मध्य पूर्व के तनावपूर्ण माहौल में युद्ध अब केवल हथियारों से नहीं बल्कि दिमागी चालों से भी लड़ा जा रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जारी संघर्ष में अपनी मिसाइलों का इतना बड़ा जखीरा इस्तेमाल कर दिया है कि उसे अन्य देशों में तैनात अपने बैकअप हथियारों की याद आने लगी है। इस पूरी स्थिति के पीछे ईरान की वह शातिर कलाकारी है जिसने दुनिया के सबसे आधुनिक रडार और सैटेलाइट सिस्टम को भ्रमित कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि अमेरिकी मिसाइलें ईरान के जिन हवाई ठिकानों को तबाह करने का दावा कर रही हैं, वहां वास्तव में कोई युद्धक विमान मौजूद ही नहीं था।

​थर्मल पेंटिंग और ऑप्टिकल इल्यूजन का घातक मेल

​ईरान ने अपने सैन्य हवाई अड्डों और रणनीतिक स्थानों की जमीन पर F-14 जैसे शक्तिशाली फाइटर जेट्स, मिसाइल लॉन्चर्स और सैन्य हेलीकॉप्टरों की हूबहू दिखने वाली आकृतियां उकेर दी हैं। इन आकृतियों की सबसे बड़ी विशेषता इनमें इस्तेमाल किया गया थर्मल पेंट है। जब अमेरिकी या इजरायली सैटेलाइट और निगरानी ड्रोन आसमान से इन ठिकानों का जायजा लेते हैं, तो यह थर्मल पेंट इंजन की गर्मी जैसा सिग्नल उत्पन्न करता है। ऊंचाई से देखने पर यह ऑप्टिकल इल्यूजन पैदा करता है जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि रनवे पर असली लड़ाकू विमान खड़े हैं। इस धोखे में आकर हमलावर सेनाएं इन्हें अपना प्राथमिक लक्ष्य मान लेती हैं और उन पर सटीक मिसाइलें दाग देती हैं।

​आर्थिक नुकसान और सैन्य संसाधनों की बर्बादी का गणित

​इस युद्ध का सबसे चौंकाने वाला पहलू इसका आर्थिक गणित है। रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि जमीन पर एक फाइटर जेट की ऐसी प्रभावी पेंटिंग बनाने में मात्र 10 डॉलर का खर्च आता है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका और इजरायल द्वारा इन 'कागजी विमानों' को नष्ट करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक औसत मिसाइल की कीमत लगभग 5 लाख डॉलर के करीब होती है। इस तरह ईरान बेहद कम निवेश में अमेरिका के सैकड़ों करोड़ रुपये और कीमती गोला-बारूद को मिट्टी में मिला रहा है। यह रणनीति न केवल आर्थिक चोट पहुंचा रही है बल्कि हमलावर देशों के हथियारों के भंडार को भी तेजी से खाली कर रही है।

​अंडरग्राउंड शेल्टर में सुरक्षित ईरान की असली वायुसेना

​जब अमेरिकी सेना तेहरान और अन्य एयरपोर्ट्स पर खड़े इन डमी जेट्स को मार गिराने का जश्न मना रही थी, तब हकीकत कुछ और ही निकलकर सामने आई। जांच में पता चला कि ईरान ने अपने वास्तविक और कीमती फाइटर जेट्स को पहले ही पहाड़ों के अंदर बने बेहद गहरे और मजबूत अंडरग्राउंड शेल्टरों में स्थानांतरित कर दिया था। ऊपर जमीन पर केवल पेंटिंग का मायाजाल बिछाया गया था ताकि दुश्मन को यह लगे कि उसने ईरान की वायुसेना की कमर तोड़ दी है। इस मनोवैज्ञानिक और तकनीकी युद्ध ने फिलहाल अमेरिका को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है क्योंकि अब हर हमले से पहले उसे यह सोचना पड़ रहा है कि वह किसी असली विमान पर निशाना साध रहा है या फिर ईरान की किसी कलाकारी पर।

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