पश्चिम एशिया की धरती इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठी है और अमेरिका-ईरान के बीच पिछले छह दिनों से जारी खूनी संघर्ष ने वैश्विक स्थिरता को हिलाकर रख दिया है। युद्ध के इस भीषण दौर में अमेरिकी सेना के पूर्व कर्नल डगलस मैकग्रेगर का एक ताजा बयान अंतरराष्ट्रीय गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। मैकग्रेगर ने बेहद चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि ईरान इस युद्ध में उम्मीद से कहीं ज्यादा मजबूती के साथ लड़ रहा है। उन्होंने अंदेशा जताया है कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने और बंदरगाह बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिसके चलते अब वाशिंगटन को रसद और सैन्य अभियान जारी रखने के लिए भारत और उसके समुद्री बंदरगाहों पर निर्भर होना पड़ सकता है।

ईरान को मिल रहा है रूस और चीन का इंटेलिजेंस सहयोग

​मैकग्रेगर के अनुसार ईरान की इस अप्रत्याशित सफलता के पीछे रूस और चीन जैसी महाशक्तियों का हाथ है। उनका तर्क है कि बीजिंग और मॉस्को न केवल स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं, बल्कि वे तेहरान को सक्रिय रूप से सैटेलाइट इंटेलिजेंस और महत्वपूर्ण डेटा साझा कर रहे हैं। इसी खुफिया जानकारी के सटीक इस्तेमाल से ईरान ने इजरायल और अमेरिका के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने में कामयाबी हासिल की है। पूर्व कर्नल ने यहां तक कह दिया कि हमारे कई महत्वपूर्ण इंस्टॉलेशन अब काम करने की स्थिति में नहीं रह गए हैं, जो अमेरिकी सैन्य प्रभुत्व के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। हालांकि, भारत सरकार या डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है।

रक्षा मंत्री ने स्वीकारी ईरानी हमलों की मारक क्षमता

​दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी हालात की गंभीरता को स्वीकार किया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में यह माना कि तमाम आधुनिक रक्षा प्रणालियों के बावजूद ईरान के कुछ हवाई हमले अपने लक्ष्यों को भेदने में सफल हो रहे हैं। हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने अपनी और अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए हैं, लेकिन युद्ध की वास्तविकता यह है कि हर हमले को रोकना मुमकिन नहीं होता। उन्होंने यह विश्वास जरूर जताया कि अमेरिका के पास युद्ध लड़ने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं और वे जल्द ही ईरानी हवाई क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लेंगे।

मुख्य सैन्य अड्डों से बाहर फैला संघर्ष

​युद्ध की विभीषिका तब और स्पष्ट हो गई जब कुवैत में एक ईरानी ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत की खबर सामने आई। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी सैनिक इस समय अत्यधिक जोखिम वाले क्षेत्र में हैं। सैनिकों की यह शहादत एक नागरिक बंदरगाह के पास हुई, जो यह दर्शाता है कि संघर्ष अब मुख्य सैन्य अड्डों से बाहर भी फैल चुका है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हालांकि अभी भी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी प्रदर्शन को दस में से पंद्रह नंबर देते हुए दावा किया कि उनकी सेना बहुत मजबूत स्थिति में है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आने वाला वक्त लंबा और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।


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