पश्चिम एशिया की भौगोलिक स्थिति और वर्तमान सैन्य समीकरणों ने इस पूरे क्षेत्र को एक ऐसे मुहाने पर खड़ा कर दिया है, जहां से वापसी का रास्ता फिलहाल नजर नहीं आता। अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू किए गए संयुक्त ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' ने तेहरान की सैन्य और आर्थिक रणनीतियों को सीधी चुनौती दी है। इस ऑपरेशन के जवाब में ईरान ने अपनी सबसे घातक चाल चलते हुए दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री लाइफलाइन, होर्मुज की जलडमरूमध्य को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। यह वह संकरा समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का एक चौथाई हिस्सा गुजरता है। अब यह क्षेत्र शांतिपूर्ण व्यापारिक मार्ग के बजाय मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन्स की गूंज से भरा हुआ है। ईरान का यह आक्रामक रवैया केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को घुटनों पर लाने की एक सोची-समझी कोशिश मानी जा रही है।
सुसाइड ड्रोन और Louise P पर हमला
हालिया घटनाक्रम में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मार्शल आइलैंड्स के ध्वज वाले तेल टैंकर Louise P को निशाना बनाकर अपनी चेतावनी को हकीकत में बदल दिया है। शनिवार को फारस की खाड़ी के बीचों-बीच हुए इस हमले में एक सुसाइड ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जिसने सीधे जहाज को टक्कर मारी। ईरान ने इस टैंकर को 'आतंकवादी अमेरिका' की संपत्ति करार देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह क्षेत्र में अमेरिकी हितों को चोट पहुंचाने से पीछे नहीं हटेगा। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी और इजरायली वायुसेना ईरान के भीतर मौजूद तेल ठिकानों और रणनीतिक बुनियादी ढांचों पर लगातार बमबारी कर रही है। Louise P पर हुआ यह हमला उस श्रृंखला की ताजा कड़ी है जिसमें पिछले कुछ दिनों के भीतर Prima और Skylight जैसे जहाजों को भी निशाना बनाया जा चुका है।
होर्मुज की घेराबंदी और वैश्विक संकट
होर्मुज की जलडमरूमध्य में ईरान की बढ़ती दखलअंदाजी ने अंतरराष्ट्रीय नौवहन कंपनियों के बीच दहशत पैदा कर दी है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह पिछले आठ दिनों से इस रास्ते पर पूर्ण नियंत्रण रखता है और अमेरिका या इजरायल से जुड़े किसी भी व्यापारिक जहाज को यहां से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस घेराबंदी का परिणाम यह हुआ है कि कई बड़ी शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों का रास्ता बदल दिया है या अपनी सेवाओं को अस्थायी रूप से रोक दिया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। अगर यह गतिरोध लंबे समय तक जारी रहता है, तो पूरी दुनिया में ईंधन की कमी और महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है, जो विकसित और विकासशील दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाओं के लिए घातक सिद्ध होगा।
ट्रंप की चेतावनी और ईरान का पलटवार
राजनीतिक मोर्चे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी नेतृत्व के बीच जुबानी जंग ने आग में घी डालने का काम किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग करते हुए दावा किया है कि अमेरिकी हमलों ने तेहरान की सैन्य ताकत को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। उनके अनुसार अब कूटनीति का समय समाप्त हो चुका है और ईरान के पास झुकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। हालांकि, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अमेरिका का ईरान को झुकाने का सपना कभी पूरा नहीं होगा। हार मानने के बजाय, ईरान अब अपने पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है, जिससे इस संघर्ष के पूरे क्षेत्र में फैलने का खतरा बढ़ गया है।
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