समुद्र के रास्ते व्यापार करने वाली दुनिया की सबसे अहम जलसंधि यानी 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज' के पास एक बार फिर स्थिति विस्फोटक हो गई है। केशम द्वीप के पास ईरान के एक व्यापारिक जहाज को निशाना बनाया गया, जिसमें 10 सदस्यीय दल में से 1 कर्मचारी की मौत हो गई और 3 लोग घायल हो गए। ईरानी अधिकारियों ने इस हमले के पीछे 'आतंकी दुश्मनों' का हाथ बताया है, जबकि ब्रिटिश समुद्री निगरानी एजेंसी (UKMTO) ने भी मिसाइल या प्रोजेक्टाइल से हमले की पुष्टि की है। लेकिन इस घटना को समझने के लिए उस पृष्ठभूमि को जानना जरूरी है जिसके कारण यह पूरा क्षेत्र बारूद के ढेर पर बैठा है।

​यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब इसी साल फरवरी से अमेरिका और इजरायल के साथ शुरू हुए युद्ध के बाद ईरान ने इस समुद्री रास्ते पर अपना कड़ा नियंत्रण स्थापित कर लिया। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के कुल कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के एक-चौथाई हिस्से की आवाजाही का मुख्य जरिया है। ईरान ने चेतावनी जारी की है कि जो भी जहाज उसकी अनुमति के बिना या तय नियमों के खिलाफ यहां से गुजरेगा, उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं होगी। अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी और ईरान द्वारा अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल हमलों की वजह से यह समुद्री रूट बेहद खतरनाक बन चुका है।

​केशम द्वीप की भौगोलिक स्थिति इस पूरे मामले में बेहद खास है। यह द्वीप बंदर अब्बास बंदरगाह से महज 22 किलोमीटर दूर है और ईरान यहीं से पूरे होर्मुज मार्ग पर अपनी निगरानी बनाए रखता है। ईरान और ओमान मिलकर इस मार्ग पर नया ट्रैफिक सिस्टम लागू करने और यहां से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूलने की योजना बना रहे हैं। ठीक इसी बातचीत और क्षेत्रीय देशों की बैठक से एक दिन पहले ईरानी जहाज पर यह हमला हुआ, जो यह दर्शाता है कि कोई भी पक्ष इस रणनीतिक रास्ते पर दूसरे का एकाधिकार स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

​हमले के बाद वैश्विक तेल और गैस बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है, क्योंकि अगर होर्मुज से जहाजों का आवागमन ठप होता है, तो पूरी दुनिया में ईंधन की किल्लत पैदा हो सकती है। इस घटना के बाद आसपास से गुजर रहे सभी कमर्शियल जहाजों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। समुद्री व्यापार सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि हमला किस ओर से दागा गया था।


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