नेशनल डेस्क: भारत सरकार ने IDBI बैंक लिमिटेड में अपनी एक बड़ी, 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार, इस हिस्सेदारी का मूल्य लगभग $7.1 बिलियन है। यह कदम सरकारी बैंकों के निजीकरण के लिए दशकों से चल रहे प्रयासों में एक निर्णायक प्रयास माना जा रहा है। यदि यह बिक्री सफल होती है, तो यह देश में किसी सरकारी बैंक का दशकों बाद होने वाला पहला निजीकरण होगा, जो भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक घटना होगी।

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बोली प्रक्रिया इसी महीने संभावित

​विश्वस्त सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार और संभावित खरीदारों के बीच बातचीत अंतिम चरण में है। उम्मीद की जा रही है कि IDBI बैंक के लिए औपचारिक बोली लगाने की प्रक्रिया इसी महीने (दिसंबर 2025 में) शुरू कर दी जाएगी। सरकार ने पहले भी बिक्री की समय-सीमा तय की थी, लेकिन नियामक मंजूरियों में देरी के कारण इसे पूरा नहीं किया जा सका था। अब अधिकारियों को उम्मीद है कि यह विनिवेश प्रक्रिया वित्त वर्ष मार्च 2026 तक पूरी हो जाएगी।


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संकट से लाभ तक का सफर: IDBI की रिकवरी

​मुंबई मुख्यालय वाला यह बैंक एक समय भारी वित्तीय संकट और खराब कर्ज (NPAs) के बोझ तले दबा हुआ था। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में सरकार और LIC से मजबूत पूंजी समर्थन मिला, जिसके बाद IDBI ने संपत्ति की गुणवत्ता (एसेट क्वालिटी) में सुधार किया। इस तेजी से हुई रिकवरी के कारण बैंक के NPAs में भारी कटौती हुई, और यह मुनाफे की स्थिति में लौट आया है। IDBI की बैलेंस शीट अब सुधर चुकी है, जिसने सरकार को इसे निजी हाथों में सौंपने के लिए प्रोत्साहित किया है।

दौड़ में शामिल दिग्गज

​शॉर्टलिस्ट किए गए संभावित खरीदार वर्तमान में बैंक का बारीकी से मूल्यांकन (ड्यू डिलिजेंस) कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, इस बैंक को खरीदने में प्रमुख रूप से कोटक महिंद्रा बैंक लिमिटेड, एमिरेट्स NBD PJSC, और फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड जैसी संस्थाओं ने रुचि दिखाई थी।

सरकार और LIC की IDBI हिस्सेदारी बिक्री

IDBI बैंक में केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की कुल मिलाकर लगभग 95 प्रतिशत हिस्सेदारी है। प्रस्तावित बिक्री के तहत, केंद्र सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि LIC अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। इस पूरी बिक्री में बैंक का प्रबंधन नियंत्रण भी नए निजी मालिक को हस्तांतरित कर दिया जाएगा।

IDBI खाताधारकों के हितों की सुरक्षा

बैंक के निजीकरण के बाद उसके कामकाज के तरीके में कुछ बदलाव आना स्वाभाविक है, लेकिन खाताधारकों के लिए यह सुनिश्चित किया गया है कि उनकी जमा राशि, बैंक अकाउंट और ऋण (Loan) की शर्तों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। वास्तव में, IDBI ग्राहकों को निजी क्षेत्र के संचालन के तहत और भी बेहतर और उन्नत बैंकिंग सुविधाएं मिलने की संभावना है। यह पूरा घटनाक्रम आने वाले समय में बैंक के शेयरों के प्रदर्शन पर भी अपनी छाप छोड़ेगा।

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