लखनऊ। उत्तर प्रदेश कैडर की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनामिका सिंह ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए आवेदन किया है। इस खबर ने न केवल प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है, क्योंकि उनका यह फैसला सामान्य सेवानिवृत्ति (मार्च 2038) से लगभग 13 साल पहले आया है। वीआरएस के कारणों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

अनामिका सिंह 2004 बैच की अधिकारी हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश में खाद्य आयुक्त के पद पर कार्यरत थीं। फतेहपुर जिले की मूल निवासी और बी.ए. (प्राचीन इतिहास) में स्नातक सिंह की गिनती एक सक्षम, सक्रिय और तेज-तर्रार प्रशासक के रूप में होती रही है। अपने करियर में वह चित्रकूट और उन्नाव की जिलाधिकारी रह चुकी हैं। इसके अलावा, उन्होंने बेसिक शिक्षा और महिला कल्याण जैसे अहम विभागों में भी जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लगभग आठ साल तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भी सेवाएं दी हैं, जहां उन्होंने नीति आयोग में निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य किया था।
आईएएस अनामिका सिंह के इस अचानक लिए गए फैसले के पीछे मुख्य वजह उनकी केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जाने की प्रबल इच्छा और उसमें आ रही बाधाएँ बताई जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार, उन्हें केंद्र में पद के लिए चुना गया था, लेकिन राज्य सरकार से उन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त नहीं हो सका, जिसके कारण वह काफी निराश थीं। इस निराशा को ही उनके अचानक वीआरएस के फैसले का मुख्य कारण माना जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कुछ समय पहले उन्हें बरेली मंडल का कमिश्नर बनाया गया था, लेकिन दो दिन के भीतर ही उनका तबादला रद्द कर दिया गया था, जिसने प्रशासनिक हलकों में काफी सुर्खियाँ बटोरी थीं।
अधिकारी वर्ग में इस बात पर भी चिंता है कि एक मजबूत और कुशल प्रशासक के रूप में अपनी छवि रखने वाली अनुभवी अधिकारी सेवाकाल समाप्त होने से पहले ही क्यों सेवा छोड़ रही हैं। उनका वीआरएस आवेदन फिलहाल राज्य सरकार के पास विचाराधीन है। राज्य सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद, अंतिम अनुमोदन के लिए यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
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