ऊधमसिंह नगर के पैगा निवासी किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के मामले में प्रशासनिक कार्यवाही तेज हो गई है। गुरुवार को कुमाऊं कमिश्नर कैंप कार्यालय हल्द्वानी में मजिस्ट्रेटी जांच के तहत पूछताछ की प्रक्रिया शुरू की गई। इस दौरान काशीपुर के एसडीएम अभय प्रताप सिंह, तहसीलदार पंकज चंदोला और आईटीआई थाना के निलंबित प्रभारी कुंदन रौतेला सहित अन्य पुलिस अधिकारी उपस्थित हुए। कमिश्नर दीपक रावत ने इन अधिकारियों से प्रकरण के विभिन्न पहलुओं पर कई घंटों तक पूछताछ की और उनके आधिकारिक बयान दर्ज किए। यह जांच विशेष रूप से उन तथ्यों पर केंद्रित है जो किसान ने अपनी मृत्यु से पूर्व सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में उजागर किए थे।

सुखवंत सिंह ने आत्महत्या से पहले एक वीडियो जारी किया था जिसमें उन्होंने अपनी चार करोड़ रुपये की जमीन के संबंध में धोखाधड़ी का उल्लेख किया था। वीडियो में कुछ प्रॉपर्टी डीलरों और पुलिस अधिकारियों के नामों का स्पष्ट रूप से जिक्र किया गया है। किसान का आरोप था कि भू-माफियाओं के साथ मिलकर कुछ अधिकारियों ने उसे परेशान किया और उसे न्याय नहीं मिला। कमिश्नर दीपक रावत ने इस वीडियो को जांच का मुख्य आधार बनाया है और इसमें नामित सभी व्यक्तियों को औपचारिक नोटिस जारी कर दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि वीडियो में लगाए गए आरोपों की सत्यता और तकनीकी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है ताकि घटना के पीछे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।

​जांच की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कुमाऊं कमिश्नर ने आगामी बृहस्पतिवार और शुक्रवार को वीडियो में नामित सभी व्यक्तियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त, प्रशासन ने जनता से भी अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति के पास इस घटना या संबंधित भूमि विवाद से जुड़े कोई भी साक्ष्य, दस्तावेज या सूचना हो, तो वह उसे प्रशासन द्वारा जारी ईमेल आईडी या फोन नंबर पर उपलब्ध करा सकता है। मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद शुरू हुई यह जांच इस बात पर केंद्रित है कि किसान को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले कारक क्या थे और इसमें प्रशासन या पुलिस स्तर पर क्या चूक हुई। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर विधिक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।


Advertisement

---समाप्त---