खटीमा के दमगढ़ा क्षेत्र में प्रशासन ने एक किसान की आजीविका पर हुए प्रहार ने पूरे इलाके में हलचल पैदा कर दी है। पीड़ित किसान ने अत्यंत भावुक और आक्रोशित लहजे में प्रशासन पर आरोप लगाया है कि उसे बिना किसी सूचना के अचानक उजाड़ दिया गया। किसान का कहना है कि 120 एकड़ के विशाल भूखंड पर उसकी कड़ी मेहनत की फसल लहलहा रही थी, जिसे प्रशासन की कथित मौजूदगी में ट्रैक्टरों से बेरहमी से रौंद दिया गया। पीड़ित का तर्क है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष होता, तो उसे अपनी बात रखने का मौका दिया जाता, लेकिन यहाँ कानून की रक्षा करने वालों ने ही कथित तौर पर कब्जा करने वालों का साथ देकर उसे बेघर और कंगाल बना दिया।

गलत कानूनी दस्तावेजों का सहारा लेने का दावा

किसान विकास तलवार पुत्र किशन तलवार ने इस पूरी कार्रवाई को एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए दस्तावेजों पर भी सवाल उठाए हैं। पीड़ित जमींदार का स्पष्ट आरोप है कि जिस कोर्ट के आदेश का भय दिखाकर उसकी खड़ी फसल को नष्ट किया गया, वह आदेश वास्तव में उस जमीन से संबंधित ही नहीं था। किसान के अनुसार, प्रभावशाली लोगों ने प्रशासन के साथ सांठगांठ कर किसी दूसरे मामले के कागजों का दुरुपयोग किया ताकि जमीन पर अवैध कब्जा किया जा सके। इस दौरान किसान चिल्लाता रहा और अपनी फसल की दुहाई देता रहा, लेकिन कथित तौर पर अधिकारियों ने उसकी एक न सुनी और देखते ही देखते करोड़ों की संपत्ति को मिट्टी में मिला दिया गया।

अधिकारियों की चुप्पी से गहराता भ्रष्टाचार का शक

इस मामले में सबसे चिंताजनक बात यह रही कि इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों ने मीडिया के सवालों से दूरी बना ली है। किसान का आरोप है कि अधिकारियों की यह चुप्पी साबित करती है कि उनके पास इस कार्रवाई का कोई ठोस और कानूनी आधार नहीं था। पीड़ित ने बताया कि उसे न्याय की कोई किरण नजर नहीं आ रही है क्योंकि रसूखदारों ने सरकारी मशीनरी को अपने पक्ष में कर लिया है। वर्तमान में इलाके में भारी तनाव है और किसान समाज इस घटना को अपनी अस्मिता पर चोट मान रहा है। पीड़ित ने अब इस पूरे षड्यंत्र की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय तक दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दी है।


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