ऊधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर स्थित ट्रांजिट कैंप इलाके में पहचान पत्रों के साथ खिलवाड़ करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए चेतन गंगवार नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया है। यह आरोपी पिछले दो साल से गड्डा कॉलोनी शिमला बहादुर में एक जन सेवा केंद्र का संचालन कर रहा था, लेकिन इसकी आड़ में वह अवैध रूप से सरकारी दस्तावेज बनाने का धंधा चला रहा था। पुलिस की छापेमारी के दौरान मौके से बड़ी मात्रा में फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और हाईस्कूल की कूटरचित अंकतालिकाएं बरामद हुई हैं। इसके अलावा पुलिस ने फिंगर प्रिंट स्कैनर और फोटो पेपर सीट जैसे आधुनिक उपकरण भी जब्त किए हैं जिनका उपयोग इन फर्जी दस्तावेजों को असली जैसा रूप देने के लिए किया जाता था।
जांच के दौरान पुलिस को तकनीक के दुरुपयोग का एक चौंकाने वाला तरीका पता चला। आरोपी चेतन गंगवार ने अपने ही आधार कार्ड के बारकोड का इस्तेमाल कर अन्य व्यक्तियों के फर्जी आधार कार्ड तैयार कर दिए थे। जब पुलिस ने मौके पर मिले कार्ड्स को आधार स्कैनर ऐप से चेक किया, तो अलग-अलग व्यक्तियों के कार्ड पर अंकित बारकोड को स्कैन करने पर आरोपी का ही विवरण सामने आया। इस तरह की कूटनीति से आरोपी ने हजारों लोगों को फर्जी पहचान पत्र थमा दिए। शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों के सामने उसकी एक न चली। पुलिस को संदेह है कि इस खेल के पीछे एक बड़ा गिरोह सक्रिय हो सकता है जो उत्तर प्रदेश के रामपुर, बरेली और बिलासपुर जैसे इलाकों से आने वाले लोगों को यहाँ का निवासी बताकर फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराता था।
सुरक्षा पर मंडराता खतरा
इस गिरोह का प्रभाव केवल पहचान पत्रों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह सिडकुल की कंपनियों में भर्ती प्रक्रिया को भी प्रभावित कर रहा था। आरोपी नाबालिग किशोर-किशोरियों की अंकतालिकाओं और आधार कार्ड में जन्मतिथि बदलकर उन्हें कागजों पर बालिग बना देता था ताकि वे नियमों के विरुद्ध जाकर फैक्ट्रियों में काम कर सकें। इसके अलावा फर्जी मार्कशीट के जरिए शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा परिषद के रिकॉर्ड के साथ भी छेड़छाड़ की गई। पुलिस प्रशासन इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है क्योंकि इस तरह से बनाए गए हजारों दस्तावेज न केवल जिले की कानून व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि इनका उपयोग आने वाले चुनावों में फर्जी मतदान और आपराधिक गतिविधियों के लिए भी किया जा सकता है।
पुलिस की कड़े एक्शन की तैयारी
एसएसपी अजय गणमति कुंभार ने इस मामले का खुलासा करते हुए साफ किया है कि पुलिस अब उन तमाम लोगों को चिह्नित करने की रणनीति बना रही है जिन्होंने इन फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया है। पुलिस उन स्थानों और संस्थानों की भी सूची तैयार कर रही है जहाँ इन कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया है। आने वाले समय में जिले के अन्य जन सेवा केंद्रों की भी सघन जांच की जा सकती है ताकि इस प्रकार के अवैध नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके। फिलहाल आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है और उससे पूछताछ जारी है ताकि इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य नामों का पता लगाया जा सके।
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