नई दिल्ली (उत्तराखण्ड तहलका): भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू किए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने देश भर के बूथ लेवल ऑफ़िसर (BLO) पर अत्यधिक दबाव डाल दिया है। 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलने वाले इस घर-घर सत्यापन अभियान के दौरान, 5.3 लाख बीएलओ पर काम का इतना बोझ पड़ा है कि कई स्थानों पर मौतें, आत्महत्याएं और मुकदमे दर्ज होने की खबरें सामने आई हैं।

काम का दबाव बना मौत का कारण?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, SIR के काम से जुड़े दबाव के चलते अब तक 15 बीएलओ की मौत की खबरें आई हैं, जिनमें कई मामले आत्महत्या के बताए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश और गुजरात से चार-चार, पश्चिम बंगाल से तीन, राजस्थान से दो और केरल-तमिलनाडु से एक-एक मौतें दर्ज की गई हैं। विपक्षी दलों, जिनमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और टीएमसी शामिल हैं, ने इन मौतों को चुनावी ड्यूटी के अत्यधिक बोझ और तनाव से जोड़ा है, जिससे यह मुद्दा अब एक गंभीर राजनीतिक विवाद बन गया है।
बीएलओ, जो अक्सर सरकारी स्कूलों के शिक्षक होते हैं, पहले से ही अपने मूल कार्यों से दबे होते हैं। 51 करोड़ से अधिक मतदाताओं की गहन जांच और गणना पत्र भरने का समयबद्ध लक्ष्य, बिना पर्याप्त संसाधनों और मानदेय के, उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रहा है।
लापरवाही के आरोप में मुकदमे दर्ज
एक ओर जहां कर्मचारी तनाव से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए कड़ी कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर (नोएडा), बहराइच और बरेली जैसे जिलों में काम में लापरवाही के लिए SIR में लगे बीएलओ और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
यह भी पढ़ें: यूपी बार काउंसिल चुनाव 2025: जैकी शुक्ला का तूफानी प्रचार, अधिवक्ता हित को बनाया मुख्य मुद्दा
गौतम बुद्ध नगर में, अलग-अलग एफआईआर में 60 से अधिक कर्मचारियों को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 32 के तहत नामजद किया गया है। अधिकारियों का आरोप है कि बार-बार निर्देश और चेतावनी के बावजूद इन कर्मचारियों ने अपने क्षेत्रों में SIR का काम पूरा नहीं किया। मुकदमों की इस कार्रवाई से जमीनी स्तर के कर्मचारियों में भय और रोष का माहौल बन गया है।
मानवीय त्रासदी पर सवाल
चुनावी लोकतंत्र की आधारशिला माने जाने वाले इस कार्य में कर्मचारियों की मौतें और उन पर दर्ज हो रहे मुकदमों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ईसीआई को तत्काल इस स्थिति का संज्ञान लेना चाहिए, बीएलओ पर काम का बोझ कम करना चाहिए और एक ऐसा सहयोगी वातावरण सुनिश्चित करना चाहिए ताकि यह महत्वपूर्ण प्रक्रिया बिना किसी और मानवीय त्रासदी के पूरी हो सके।
---समाप्त---