नई दिल्ली (Uttarakhand Tehelka)दिल्ली ब्लास्ट में Pulwama और डॉक्टरों की संलिप्तता ने सभी को चौका दिया है। ​वहीं विस्फोट की जाँच ने सुरक्षा एजेंसियों को एक गहरे और भयावह सत्य से रूबरू कराया है। केंद्रीय जाँच एजेंसियों (NIA, IB) की संयुक्त कार्रवाई में एक ऐसे संगठित आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसके तार 2019 के Pulwama आतंकी हमले की साज़िश से सीधे जुड़ रहे हैं। यह 'पुलवामा कनेक्शन' एक व्यापक सफेदपोश स्लीपर मॉड्यूल को उजागर करता है, जिसे डॉक्टर और उच्च-शिक्षित पेशेवरों ने अपनी प्रतिष्ठित पहचान की आड़ में देश भर में सक्रिय कर रखा था।

जाँच में टर्निंग पॉइंट: विस्फोटक और फंडिंग का 'Pulwama पैटर्न'

​दिल्ली विस्फोट की जाँच शुरू होते ही, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने घटनास्थल से बरामद अवशेषों के फॉरेंसिक विश्लेषण पर ध्यान केंद्रित किया। इस विश्लेषण में मिले शुरुआती संकेत चौंकाने वाले थे:

विस्फोटक की समानता: रिपोर्टों के अनुसार, विस्फोट में इस्तेमाल किए गए कुछ रासायनिक यौगिकों (Chemical Compounds) की प्रकृति, उस विस्फोटक मिश्रण से मिलती है जिसका उपयोग पुलवामा हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के काफिले पर घातक हमला करने के लिए किया गया था। यह समानता इस बात की ओर इशारा करती है कि या तो विस्फोटक का स्रोत एक ही है, या फिर दोनों हमलों के पीछे की तकनीकी विशेषज्ञता साझा की गई है। वित्तीय रूट की मैपिंग: तकनीकी खुफिया जानकारी (Technical Intelligence) से पता चला है कि दिल्ली विस्फोट की फंडिंग के लिए इस्तेमाल किए गए कुछ जटिल वित्तीय रूट (क्रिप्टो या हवाला) वही थे जिनका इस्तेमाल पुलवामा हमले के बाद के आतंकी नेटवर्कों द्वारा किया जाता रहा है।

​इस 'पुलवामा कनेक्शन' ने जाँच का रुख़ केवल दिल्ली तक सीमित न रखकर, सीधे सीमा पार से संचालित होने वाले बड़े आतंकी नेटवर्क की ओर मोड़ दिया।

यह भी पढ़ें: Delhi ब्लास्ट पर ताजा अपडेट्स: मृतकों की संख्या बढ़कर हुई 13! कार मालिक हिरासत में, NIA की जांच तेज

सफेदपोशों की आड़ में पाँच साल की साज़िश

​Pulwama के धागे से एजेंसियों ने उस स्लीपर मॉड्यूल तक पहुँच बनाई, जिसका भंडाफोड़ पहले श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के पोस्टर मामले में हुआ था। यह नेटवर्क पिछले पाँच वर्षों से उत्तर प्रदेश, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में एक 'गुप्त' आतंकी सेना तैयार कर रहा था।


Advertisement
आतंक का नया चेहरा: इस मॉड्यूल के मुख्य सदस्य डॉक्टर, छात्र, और धार्मिक शिक्षक थे। सहारनपुर (यूपी) के डायलिसिस विशेषज्ञ डॉ. अदील अहमद और फरीदाबाद के डॉ. मुजाहिल शकील जैसे पेशेवर अपनी क्लीनिकों और अस्पतालों को आतंकी गतिविधियों की ढाल बना रहे थे। भर्ती और ब्रेनवाशिंग: ये पेशेवर अपनी विश्वसनीयता का फायदा उठाकर धार्मिक या सामाजिक कार्यों की आड़ में भोले-भाले युवाओं से मिलते थे। उनका मुख्य काम कट्टरपंथी विचारधारा के आधार पर युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद के लिए भर्ती करना था। अंतिम लक्ष्य: जाँच में स्पष्ट हुआ कि इनका उद्देश्य केवल मौजूदा आतंकी संगठनों की मदद करना नहीं था, बल्कि भविष्य में ये सभी मिलकर अलकायदा (Al Qaeda) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) की तर्ज पर भारत में अपना खुद का एक शक्तिशाली आतंकी संगठन खड़ा करना चाहते थे।

विदेशी संचालन और बरामदगी

​गिरफ्तार संदिग्धों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जाँच में पता चला है कि यह पूरा मॉड्यूल पाकिस्तान और विदेश में बैठे उनके हैंडलर्स के निर्देशों पर काम कर रहा था। संचार के लिए टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड (Encrypted) प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा था।

​गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इन सदस्यों के ठिकानों से एके-47 राइफलें, भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, टाइमर, और कारतूसों का एक बड़ा जखीरा बरामद किया। यह बरामदगी स्पष्ट करती है कि दिल्ली ब्लास्ट इस बड़े आतंकी साज़िश की सिर्फ एक कड़ी थी और उनका इरादा देश के कई अन्य हिस्सों को दहलाने का था।

राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों का व्यापक 'क्लीन-अप' ऑपरेशन

​'Pulwama कनेक्शन' और 'आतंकी डॉक्टर' मॉड्यूल के खुलासे के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियाँ अब बड़े पैमाने पर संयुक्त अभियान चला रही हैं। NIA, UP ATS और जम्मू-कश्मीर पुलिस की टीमें विभिन्न राज्यों में छापेमारी कर रही हैं। गृह मंत्रालय ने सभी संबंधित राज्यों को हाई अलर्ट पर रहने और इस नेटवर्क के शेष स्लीपर सेल्स की पहचान कर उन्हें निष्क्रिय करने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

---समाप्त---