राजस्थान के धौलपुर से शुरू हुई एक घिनौनी वारदात का पटाक्षेप उत्तर प्रदेश के वृंदावन की गलियों में एक ऐसे नाटकीय मोड़ पर हुआ जिसने पुलिस और जनता दोनों को हतप्रभ कर दिया है। यह कहानी सिर्फ एक जघन्य अपराध की नहीं है, बल्कि एक अपराधी के उस शातिराना दिमाग की भी है जिसने कानून के लंबे हाथों से बचने के लिए अपनी पहचान और लिंग तक को छिपाने की कोशिश की। 15 दिसंबर की वह तारीख पीड़िता के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं थी जब नौकरी की तलाश और बेहतर भविष्य की उम्मीद ने उसे एक ऐसे जाल में धकेल दिया जहाँ सिर्फ हैवानियत थी। आरोपी ने मोबाइल नंबर के जरिए संपर्क साधकर पीड़िता को रोजगार का लालच दिया और उसे अपने घर बुलाकर उसकी गरिमा को तार-तार कर दिया। वारदात के बाद आरोपी को बखूबी अंदाजा था कि पुलिस उस तक पहुँच जाएगी, इसलिए उसने फरारी काटने के लिए एक ऐसा रास्ता चुना जिसकी कल्पना सामान्यतः नहीं की जाती।

पहचान छिपाने के लिए वेशभूषा का सहारा

​पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए आरोपी सीधा कान्हा की नगरी वृंदावन पहुँचा। यहाँ की भीड़ और विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच खुद को सुरक्षित मानकर उसने अपना पूरा हुलिया बदल लिया। उसने न केवल महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले बुर्के का सहारा लिया बल्कि अपने चेहरे को पूरी तरह स्त्री जैसा दिखाने के लिए होंठों पर लिपस्टिक तक लगाई। वह वृंदावन की गलियों में एक मुस्लिम महिला का रूप धरकर घूमता रहा ताकि किसी को उस पर रत्ती भर भी शक न हो। अपराधी का यह व्यवहार स्पष्ट करता है कि वह कितना मंझा हुआ खिलाड़ी था और पुलिस की नजरों से बचने के लिए किसी भी हद तक गिर सकता था। 10 हजार रुपये का इनाम घोषित होने के बाद पुलिस की घेराबंदी तेज हो गई थी लेकिन वह धार्मिक स्थलों की भीड़ का फायदा उठाकर लगातार बच रहा था।

तकनीकी जाल और पुलिस की मुस्तैदी


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​धौलपुर पुलिस के लिए यह मामला किसी चुनौती से कम नहीं था। पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में बनी विशेष टीमों ने आधुनिक तकनीक और पारंपरिक मुखबिर तंत्र का एक साथ सहारा लिया। जांच की सुई जब राजस्थान की सीमाओं को पार कर उत्तर प्रदेश की ओर मुड़ी तो पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों को आधार बनाया। अलग-अलग टीमों ने करीब 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को घंटों तक खंगाला। इसी दौरान एक 'महिला' की संदिग्ध चाल-ढाल ने पुलिस का माथा ठनका दिया। जब पुलिस ने उस बुर्काधारी व्यक्ति को रोककर जांच की तो उसकी असली पहचान सामने आते ही सब दंग रह गए। लिपस्टिक लगाए हुए उस चेहरे के पीछे वही फरार अपराधी छिपा था जिसकी तलाश कई हफ्तों से की जा रही थी। यह गिरफ्तारी अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि वे चाहे कितना भी वेश बदल लें, कानून से नहीं बच पाएंगे।

न्याय की गूंज और कड़े दंड की मांग

​इस जघन्य अपराध ने समाज के भीतर एक गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। नौकरी दिलाने के नाम पर महिलाओं का शोषण और फिर पुलिस को चकमा देने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाना अपराधी के दुस्साहस को उजागर करता है। आम जनता के बीच इस गिरफ्तारी के बाद से ही कड़ी सजा की मांग उठ रही है। लोगों का तर्क है कि जिस तरह आरोपी ने एक युवती के विश्वास और उसकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया, उसे किसी भी सूरत में रियायत नहीं मिलनी चाहिए। समाज के विभिन्न वर्गों का कहना है कि ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होनी चाहिए और अपराधी को फांसी जैसी कठोरतम सजा दी जानी चाहिए। ऐसी सजा ही भविष्य में उन लोगों के मन में खौफ पैदा करेगी जो मासूमों को अपना शिकार बनाने की साजिश रचते हैं। फिलहाल पुलिस आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है ताकि केस को मजबूती से अदालत में पेश किया जा सके।

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