बिलासपुर (विशेष संवाददाता)। 'दीपक तले अंधेरा' वाली कहावत इस समय बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र पर पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। उत्तर प्रदेश सरकार में बिलासपुर का प्रतिनिधित्व करने वाले और सूबे के सिंचाई राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख के अपने ही गृह क्षेत्र में अन्नदाता आज पानी की एक-एक बूंद को मोहताज है। सूबे की सरकार भले ही हर खेत तक पानी पहुंचाने और किसानों के हित में बड़ी-बड़ी बातें कर रही हो, लेकिन सिंचाई मंत्री के अपने ही गढ़ में सरकारी दावों की हवा निकल चुकी है। जुलाई का महीना आधा बीतने को है, लेकिन क्षेत्र में मानसून की बेरुखी और सिंचाई विभाग की घोर लापरवाही के चलते हजारों एकड़ कृषि भूमि सूखी पड़ी है, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं।
जर्जर हुआ भाखड़ा डैम, नहरों में उड़ रही धूल
इलाके के किसानों की लाइफलाइन कहा जाने वाला बिलासपुर स्थित भाखड़ा डैम इस समय पूरी तरह बदहाली के आंसू रो रहा है। हालत यह है कि डैम का जलस्तर शून्य (डेड स्टोरेज) पर पहुंच गया है। स्थानीय प्रशासन और सिंचाई विभाग की सुस्ती का आलम यह है कि डैम के लोहे के पटले (फाटक) जगह-जगह से टूटकर जर्जर हो चुके हैं, जिससे पानी रोकने या सुचारू रूप से छोड़ने की व्यवस्था ध्वस्त है। रखरखाव के अभाव में इस डैम से निकलने वाली दोनों मुख्य नहरें सूखी पड़ी हैं। इन नहरों के भरोसे बिलासपुर और आसपास के दर्जनों गांवों के किसान अपनी फसलों की सिंचाई करते थे, लेकिन आज इनमें पानी की जगह सिर्फ धूल और खरपतवार नजर आ रहे हैं।
धान की रोपाई ठप, बेहन खेतों में ही झुलसी
सावन का महीना शुरू होने को है और यह समय धान की रोपाई के लिए सबसे कीमती माना जाता है। एक तरफ प्रकृति ने दगा दी है और समय पर बारिश नहीं हुई, वहीं दूसरी तरफ सरकारी तंत्र के निकम्मेपन ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी। नहरों में पानी न आने के कारण क्षेत्र में धान की रोपाई का काम पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। जिन किसानों ने महंगे दामों पर डीजल फूंककर या कर्ज लेकर जैसे-तैसे धान की पौध (बेहन) तैयार भी की थी, अब वह पानी के अभाव में खेतों में ही पीली पड़कर सूख रही है। किसान रोज आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं, लेकिन न तो इंद्रदेव मेहरबान हो रहे हैं और न ही सिंचाई मंत्री का विभाग जाग रहा है।
अन्नदाताओं ने बयां किया अपना दर्द, फूटा गुस्सा
ग्राउंड जीरो पर जब हमारे संवाददाता ने प्रभावित गांवों का दौरा किया, तो किसानों का गुस्सा और दर्द छलक पड़ा। किसानों का कहना है कि वीआईपी क्षेत्र होने का उन्हें फायदा मिलने के बजाय नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसान सुखविंदर सिंह ने भर्राए गले से कहा, "जब हमारे इलाके के विधायक सूबे के सिंचाई मंत्री बने, तो हमें लगा था कि अब हमारी नहरें कभी सूखी नहीं रहेंगी। लेकिन आज सबसे बुरा हाल हमारे ही बिलासपुर का है। हमें क्या पता था कि हमारे साथ ऐसा सौतेला व्यवहार होगा।"
हरजीत सिंह का कहना था, "डीजल के दाम इतने बढ़ चुके हैं कि हर पानी पर हजारों का खर्चा आ रहा है। छोटा किसान पंपसेट के भरोसे पूरी खेती नहीं कर सकता। अगर हफ़्ते भर में नहर का पानी नहीं आया, तो हमारी साल भर की मेहनत मिट्टी में मिल जाएगी।"
लालता प्रसाद ने विभाग को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "भाखड़ा डैम के पटले महीनों से टूटे पड़े हैं। जब मंत्री जी को पता था कि जुलाई में पानी की जरूरत होगी, तो पहले मरम्मत क्यों नहीं कराई गई? अफसर सिर्फ दफ्तरों में बैठकर कागजी घोड़े दौड़ा रहे हैं।"
अकबर अली ने कहा, "हमारी बेहन धूप में जलकर राख हो रही है। मंत्री जी के इलाके का यह हाल है तो बाकी जिलों के किसानों का क्या हाल होगा, समझा जा सकता है। हम तो पूरी तरह तबाह होने की कगार पर हैं।"
शीघ्र शुरू होगी मरम्मत, जल्द आएगा पानी: सिंचाई राज्य मंत्री
इस पूरे गंभीर मामले और किसानों के बढ़ते आक्रोश को लेकर जब हमारे संवाददाता ने सिंचाई राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख से बात की, तो उन्होंने मामले पर जल्द राहत का आश्वासन दिया। मंत्री औलख ने कहा, "मामला पूरी तरह मेरे संज्ञान में है और मैं खुद स्थिति की निगरानी कर रहा हूँ। भाखड़ा डैम के टूटे पटलों की मरम्मत के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दे दिए गए हैं और इसके लिए जरूरी बजट भी स्वीकृत करा दिया गया है। युद्ध स्तर पर काम शुरू कराया जा रहा है। किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है, बहुत जल्द डैम को दुरुस्त कर नहरों में पानी छोड़ दिया जाएगा।"
बड़ा सवाल: समय रहते क्यों नहीं जागे अधिकारी?
मंत्री जी भले ही जल्द पानी छोड़ने का दावा कर रहे हों, लेकिन क्षेत्र का किसान अब खोखले आश्वासनों से थक चुका है। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब सिंचाई विभाग को पता था कि जुलाई में धान का सीजन शुरू होना है, तो मई-जून के महीनों में डैम की मरम्मत और नहरों की सफाई क्यों नहीं कराई गई? क्या विभाग हमेशा फसलें बर्बाद होने और आपदा आने का ही इंतजार करता रहता है? अगर अगले तीन-चार दिनों के भीतर नहरों के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचा, तो बिलासपुर के किसानों को इस साल भुखमरी और भारी कर्ज की मार झेलनी पड़ेगी।