दिल्ली की राजनीति में पिछले कई वर्षों से उथल-पुथल मचाने वाले कथित आबकारी नीति घोटाले में एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा मोड़ आया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है। विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सीबीआई द्वारा पेश की गई हजारों पन्नों की चार्जशीट में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि शराब नीति के निर्माण में कोई आपराधिक साजिश रची गई थी। अदालत का यह निर्णय न केवल इन नेताओं के लिए एक बड़ी राहत है, बल्कि इसे आम आदमी पार्टी की राजनीतिक शुचिता की जीत के रूप में भी देखा जा रहा है।

अदालत ने सीबीआई की जांच पर उठाए गंभीर सवाल

​सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार किए। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि जांच एजेंसी का पूरा मामला किसी ठोस सबूत के बजाय महज कयासों और अनुमानों के इर्द-गिर्द बुना गया था। अदालत ने पाया कि चार्जशीट में कई विरोधाभास थे और गवाहों के बयानों से भी कोई आरोप सिद्ध नहीं हो पा रहा था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कोर्ट ने जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं, जो यह दर्शाता है कि अदालत जांच की निष्पक्षता से संतुष्ट नहीं थी। कोर्ट ने यह भी माना कि जब मामला किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा हो, तो बिना पुख्ता प्रमाण के आरोप लगाना कानून के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

केजरीवाल का भावुक संबोधन और विपक्ष पर प्रहार

​अदालत से बरी होने के बाद जब अरविंद केजरीवाल मीडिया के सामने आए, तो वे अपने आंसू नहीं रोक पाए। उन्होंने रुंधे हुए गले से कहा कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में केवल ईमानदारी की कमाई की है और आज न्यायालय ने उस पर अपनी मुहर लगा दी है। केजरीवाल ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा हमला बोलते हुए इसे आजाद भारत का सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी को कुचलने के लिए उनके शीर्ष नेतृत्व को बिना किसी वजह के जेल की सलाखों के पीछे डाला गया। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि सत्ता के लिए विपक्ष के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज करना लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है।

संविधान और न्यायपालिका पर जताया अटूट भरोसा

​इस कानूनी लड़ाई में लंबे समय तक जेल में रहने वाले मनीष सिसोदिया ने भी फैसले का स्वागत करते हुए इसे बाबा साहब अंबेडकर के संविधान की जीत बताया। उन्होंने कहा कि अंततः सत्य की ही विजय होती है और देश की न्याय प्रणाली ने आज इसे चरितार्थ कर दिया है। आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं ने भी इस फैसले को 'कट्टर ईमानदारी' का प्रमाण पत्र बताया है। पार्टी का मानना है कि इस फैसले से आगामी चुनावों में उनकी स्थिति और मजबूत होगी। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी इसे भाजपा की साजिशों की हार बताते हुए जनता से माफी मांगने की मांग की है।


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सीबीआई की उच्च न्यायालय में तत्काल चुनौती

​निचली अदालत से झटका लगने के महज छह घंटे के भीतर सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जांच एजेंसी ने राउज एवेन्यू कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। सीबीआई का तर्क है कि ट्रायल कोर्ट ने जांच के कई महत्वपूर्ण पहलुओं और सबूतों को नजरअंदाज किया है। एजेंसी अब भी अपने इस दावे पर कायम है कि शराब नीति के माध्यम से अनुचित लाभ पहुंचाया गया और उससे प्राप्त धन का उपयोग गोवा विधानसभा चुनाव में किया गया। सीबीआई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले को ऊपरी अदालतों में ले जाकर अपनी जांच को सही साबित करने का प्रयास जारी रखेगी।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं 

​इस फैसले के बाद दिल्ली की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक ओर जहां आम आदमी पार्टी जश्न मना रही है, वहीं भाजपा ने अब भी केजरीवाल सरकार पर सवाल उठाए हैं। भाजपा नेताओं का तर्क है कि यदि नीति सही थी, तो जांच शुरू होते ही उसे वापस क्यों लिया गया। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भी न्यायपालिका की मजबूती की सराहना करते हुए कहा कि कोर्ट के फैसले का सम्मान होना चाहिए। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ईडी का मामला अभी लंबित है, लेकिन सीबीआई केस में बरी होने का सकारात्मक प्रभाव अन्य संबंधित मामलों पर भी पड़ सकता है।

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