अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले 'स्टेट ऑफ द यूनियन' संबोधन के दौरान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को लेकर कई हैरान करने वाले दावे किए हैं। उन्होंने वैश्विक मंच पर अपनी उपलब्धियों का बखान करते हुए कहा कि उनके हस्तक्षेप के कारण दुनिया के विभिन्न हिस्सों में होने वाले आठ संभावित युद्ध टल गए। ट्रंप ने विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच उपजे तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि यदि वे बीच में न आते तो दोनों देशों के बीच परमाणु युद्ध छिड़ सकता था। उनके अनुसार पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्वयं यह स्वीकार किया था कि अमेरिकी मध्यस्थता के बिना स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती थी और करोड़ों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती।
ट्रंप ने फिर अलापा मध्यस्थता का दावा
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने भाषण में 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख करते हुए एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया कि मई 2025 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिवसीय सैन्य संघर्ष चरम पर था, तब उन्होंने निर्णायक भूमिका निभाई थी। ट्रंप का तर्क है कि पाकिस्तानी नेतृत्व ने उनसे संपर्क साधा था क्योंकि भारतीय सैन्य कार्रवाई के सामने पड़ोसी देश रक्षात्मक मुद्रा में आ गया था। ट्रंप ने कहा कि उनके प्रयासों की वजह से ही वह संघर्ष रुक सका जिसने दक्षिण एशिया में शांति बहाली में मदद की। उन्होंने अपनी सूची में भारत-पाक के अलावा इजरायल, ईरान, सर्बिया और रवांडा जैसे देशों के बीच चल रहे विवादों को भी सुलझाने का श्रेय खुद को दिया।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने किया खारिज
भारत ने हमेशा की तरह राष्ट्रपति ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। नई दिल्ली का रुख इस मामले में बहुत स्पष्ट रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी प्रकार के तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्रंप के इन दावों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उस तनावपूर्ण स्थिति के दौरान अमेरिका केवल अपनी भौगोलिक सीमाओं के भीतर ही सीमित था। उनके इस बयान ने स्पष्ट कर दिया कि भारत अपनी सुरक्षा और कूटनीतिक निर्णयों के लिए किसी बाहरी शक्ति पर निर्भर नहीं है। भारत सरकार ने बार-बार यह दोहराया है कि संघर्ष विराम का निर्णय पूरी तरह से जमीनी हकीकत और सैन्य संवाद पर आधारित था।
युद्धविराम में तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी-विदेश सचिव
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भी ट्रंप के बयानों को तथ्यहीन बताते हुए वास्तविक स्थिति स्पष्ट की है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मई 2025 के उस संघर्ष के दौरान पाकिस्तान के सैन्य महानिदेशक यानी डीजीएमओ ने हॉटलाइन के माध्यम से भारतीय समकक्ष से संपर्क किया था। पाकिस्तान की ओर से ही संघर्ष को रोकने और युद्धविराम लागू करने का अनुरोध किया गया था। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया दोनों देशों के बीच स्थापित सैन्य प्रोटोकॉल का हिस्सा थी और इसमें किसी भी विदेशी नेता या मध्यस्थ की कोई भूमिका नहीं थी। भारत ने स्पष्ट किया है कि उसकी सैन्य कार्रवाई केवल अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए थी और युद्धविराम का निर्णय द्विपक्षीय था।
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