मध्यप्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। चुनावी मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी को मिली करारी हार के बाद पार्टी संगठन ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा एक्शन लिया है। समीक्षा बैठक के महज 24 घंटों के भीतर ही प्रदेश नेतृत्व ने दतिया जिले की पूरी संगठनात्मक इकाई को तत्काल प्रभाव से भंग करने का आदेश जारी कर दिया। इसमें जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा समेत सभी मोर्चों, प्रकोष्ठों और मंडल समितियों की कार्यकारिणी शामिल है।

​भाजपा के भीतर यह असंतोष उपचुनाव की घोषणा के साथ ही गहराने लगा था। पार्टी ने पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के बजाय आशुतोष तिवारी को अपना प्रत्याशी बनाया, जिससे स्थानीय कार्यकर्ता और नेतृत्व असहज हो गए थे। हालांकि, शीर्ष नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद नरोत्तम मिश्रा ने प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार भी किया, लेकिन अंदरूनी खींचतान पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। नतीजों में भाजपा प्रत्याशी को 6,000 से अधिक वोटों से पराजय का सामना करना पड़ा, जिसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में हुई उच्चस्तरीय बैठकों की सिफारिश पर यह कठोर अनुशासनात्मक कदम उठाया गया।

​दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी इस सीट को बचाने में तो कामयाब रही, लेकिन चुनाव के दौरान उसकी अंदरूनी कलह भी पूरी तरह उजागर हो गई। मतदान से ठीक पहले दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती और कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह के बीच तीखा सार्वजनिक टकराव देखने को मिला। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि मतगणना से महज एक दिन पहले पार्टी को अनुशासनहीनता के आरोप में राजेंद्र भारती को प्राथमिक सदस्यता से निलंबित करना पड़ा था।

​तमाम विवादों और खींचतान के बावजूद दतिया राजघराने से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस उम्मीदवार कुंवर घनश्याम सिंह मतदाताओं का विश्वास जीतने में सफल रहे। दतिया के नतीजों ने साफ कर दिया है कि भाजपा जहां अनुशासनहीनता पर कड़ा संदेश देकर संगठन को नए सिरे से गढ़ने में जुट गई है, वहीं कांग्रेस स्थानीय चेहरे और क्षेत्रीय मुद्दों के दम पर अंदरूनी गुटबाजी के असर को बेअसर करने में सफल रही।


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