जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की वादियों में अब पर्यटकों को बाघों की दहाड़ और पक्षियों की चहचहाहट के बीच मोबाइल की रिंगटोन या सेल्फी का शोर सुनाई नहीं देगा। सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद पार्क प्रशासन ने सफारी के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाने का निर्णय लिया है। यह फैसला केवल मनोरंजन के लिए आने वाले सैलानियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब जंगल के भीतर ड्यूटी पर तैनात गाइडों और जिप्सी चालकों को भी अपने संचार उपकरणों को बाहर ही छोड़ना होगा। लंबे समय से यह देखा जा रहा था कि वन्यजीवों के दीदार से ज्यादा लोग उनकी तस्वीरें खींचने और सोशल मीडिया पर रील बनाने के लिए उतावले रहते थे, जिससे न केवल जानवरों की निजता भंग होती थी बल्कि सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरे पैदा हो रहे थे।
रील संस्कृति और शोर से वन्यजीवों के अस्तित्व पर संकट
आधुनिकता की दौड़ में जंगल अब प्राकृतिक अनुभव के केंद्र कम और फोटोशूट के ठिकाने ज्यादा बन गए थे। सफारी के दौरान जैसे ही बाघ या कोई अन्य दुर्लभ वन्यजीव दिखाई देता, दर्जनों मोबाइल फोन हवा में लहराने लगते थे। कई बार बेहतर फुटेज के चक्कर में पर्यटक और गाइड नियमों को ताक पर रखकर जानवरों के बेहद करीब जाने का दुस्साहस करते थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस बढ़ती अराजकता पर संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया है कि पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए कड़े कदम उठाने अनिवार्य हैं। मोबाइल फोन पर बजने वाले गाने और बातचीत का शोर जानवरों के व्यवहार को प्रभावित कर रहा था, जिससे उनके हिंसक होने की घटनाएं भी सामने आ रही थीं। अब इस पाबंदी के बाद प्रशासन उम्मीद कर रहा है कि जंगल का नैसर्गिक वातावरण फिर से बहाल हो सकेगा।
नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस आदेश की अवहेलना करता पाया गया, तो उसका फोन जब्त करने के साथ-साथ उस पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। गाइडों और ड्राइवरों के लिए यह नियम और भी सख्त है क्योंकि उनकी जिम्मेदारी पर्यटकों को अनुशासित रखने की होती है। यदि किसी जिप्सी में सैलानी फोन का उपयोग करते पाए जाते हैं, तो संबंधित गाइड का लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकता है। प्रवेश द्वारों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा ताकि कोई भी उपकरण चोरी-छिपे अंदर न ले जाया जा सके। यह कदम कॉर्बेट को उसकी पुरानी गरिमा वापस दिलाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित होगा, जहाँ इंसान केवल एक मूक दर्शक बनकर प्रकृति का सम्मान करना सीखेगा।
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