नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी के खिलाफ दिल्ली में लंबा आंदोलन चलाने वाली कॉकरोच जनता पार्टी ने अब आदिवासी इलाकों के बच्चों की पढ़ाई के लिए मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख अभिजीत दीपके ने नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान का बिगुल फूंका। इससे पहले पार्टी 'स्कूल ठीक करो' नाम से एक मुहीम चला चुकी है, जिसके तहत देश के अलग-अलग राज्यों में जाकर सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत दिखाई गई थी। अब इस नए अभियान के जरिए सीधे उन सुदूर ग्रामीण और जंगलों से सटे इलाकों का रुख किया जाएगा, जहां बुनियादी सुविधाओं का भारी अकाल है।

​आदिवासी इलाकों का दौरा

नागपुर में पत्रकारों से बात करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि देश को आजाद हुए करीब आठ दशक बीत जाने के बाद भी आदिवासी इलाकों में बने स्कूलों की हालत चिंताजनक बनी हुई है। गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और झारखंड जैसे राज्यों में आदिवासियों की बड़ी आबादी बसती है, लेकिन वहां के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने की दिशा में ठोस काम नहीं हुआ। सीजेपी की टीमें अब खुद इन इलाकों में जाकर स्कूलों का जायजा लेंगी और यह देखेंगी कि बच्चे किन हालात में पढ़ाई कर रहे हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश के बालाघाट में हुई बच्चों की मौतों के बाद पार्टी नेताओं ने वहां के स्कूलों का दौरा किया था, जिसके बाद यह अलग अभियान शुरू करने का फैसला लिया गया।

​बदहाली का मुद्दा


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पार्टी प्रमुख ने साफ किया कि इन हालात के लिए किसी एक राजनीतिक दल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अब तक आईं तमाम सरकारों ने इन इलाकों की अनदेखी की है। उन्होंने आंकड़े रखते हुए दावा किया कि महाराष्ट्र में पिछले दो सालों के भीतर 590 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की जान गई है। अगर यही स्थिति किसी बड़े शहर की होती तो हंगामा मच जाता। बालाघाट में भी तीन महीनों में दर्जनों बच्चों की मौत की खबरें सामने आई हैं। दीपके का कहना है कि आदिवासी बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही सरकारी मदद और बेहतर माहौल नहीं मिल पाता। पार्टी इस अभियान के माध्यम से सभी राज्य सरकारों से अपील करेगी कि वे इन स्कूलों की सुध लें।

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