देश में 20 प्रतिशत एथनाल मिश्रित पेट्रोल (ई-20) को अनिवार्य किए जाने के बाद आम लोगों और पुरानी गाड़ियों के मालिकों की चिंताएं जस की तस बनी हुई हैं। इस मुद्दे पर वित्त मंत्रालय और पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय के बीच नीतिगत मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। वित्त मंत्रालय के तहत मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने आलेख लिखकर ई-10 को दोबारा उपलब्ध कराने का समर्थन किया है, जिससे पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारी असहज नजर आ रहे हैं।

​सलाहकारों का सुझाव

​सीईए वी. अनंत नागेश्वरन ने आर्थिक मामलों के विभाग के सलाहकार आकाश पुजारी के साथ मिलकर लिखे आलेख में कहा है कि पेट्रोल पंपों पर ई-20 के साथ-साथ ई-10 जैसे कम एथनाल वाले ईंधन को भी विकल्प के रूप में बहाल किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे जनता की ज्यादातर चिंताएं शांत हो जाएंगी, एथनाल का इस्तेमाल बढ़ेगा और मौजूदा गाड़ियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।

​माइलेज और आरोप

​आलेख में स्पष्ट किया गया है कि ई-20 से इंजन खराब होने का जो आरोप इंटरनेट मीडिया पर फैल रहा है, वह मुख्य रूप से गलत है। हालांकि, एथनाल में पेट्रोल की तुलना में लगभग दो-तिहाई ऊर्जा होती है, इसलिए ई-20 पर माइलेज में करीब 6 से 7 प्रतिशत की कमी आ सकती है, न कि 30 प्रतिशत की जैसा दावा किया जा रहा है। इसके साथ ही ई-20 से आगे ई-27 या ई-30 की ओर बढ़ने से पहले जमीन, पानी और फसल पैटर्न पर पड़ने वाले प्रभावों के आकलन की सलाह दी गई है।

​मंत्रालय का रुख

​दूसरी ओर, पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि ई-0 या ई-10 की बिक्री दोबारा शुरू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्रालय का तर्क है कि ई-20 वैज्ञानिक रूप से मान्य है और ऑटोमोबाइल उद्योग ने परीक्षणों के बाद इसे स्वीकार किया है। इसके अलावा, देशभर में एक लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग ग्रेड के ईंधन के लिए समानांतर सप्लाई चेन बनाए रखना भारी लॉजिस्टिक चुनौती पैदा करेगा और अब तक किया गया निवेश बेकार हो सकता है।


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