इंदौर जिले के सैन्य क्षेत्र महू में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां शहर के जाने-माने होटल व्यवसायी और मेवाड़ा परिवार के सदस्य विक्रम मेवाड़ा को कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर धमकी दी गई है। जानकारी के अनुसार, विक्रम मेवाड़ा को एक अज्ञात कॉल आया जिसमें कॉलर ने खुद को बिश्नोई गैंग का गुर्गा बताते हुए पांच करोड़ रुपये की मांग की। इस फिरौती की मांग ने न केवल परिवार को बल्कि पूरे व्यापारिक समुदाय को चिंता में डाल दिया है। व्यवसायी ने तुरंत इस गंभीर विषय की सूचना महू के एडिशनल एसपी रूपेश द्विवेदी को दी, जिसके बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है।

गोवा की संपत्ति और सटीक जानकारी ने चौंकाया

​इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि धमकी देने वाले व्यक्ति के पास विक्रम मेवाड़ा की व्यावसायिक गतिविधियों की सटीक जानकारी थी। फोन करने वाले ने विशेष रूप से गोवा में खरीदी गई करोड़ों रुपये की संपत्ति का जिक्र किया और इसी के एवज में भारी भरकम रकम की मांग की। बातचीत के दौरान आरोपी ने करीब डेढ़ मिनट तक विक्रम को डराया और साफ शब्दों में कहा कि यदि पांच करोड़ रुपये नहीं दिए गए तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। कॉलर के पास मौजूद इस निजी डेटा ने पुलिस को भी सतर्क कर दिया है कि आखिर यह जानकारी बाहर कैसे लीक हुई।

तकनीकी चुनौती और पुलिस की प्रारंभिक जांच

​पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जिस कॉल से धमकी दी गई थी, उसकी पहचान करना फिलहाल एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। पीड़ित के मोबाइल स्क्रीन पर कोई नंबर प्रदर्शित नहीं हो रहा था और वहां केवल 'प्राइवेट नंबर' लिखा हुआ आ रहा था। आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय कॉल्स या विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए किए गए कॉल में इस तरह की स्थिति बनती है। ग्रामीण एसडीओपी उमाकांत चौधरी ने स्पष्ट किया है कि पुलिस हर तकनीकी पहलू की गहराई से जांच कर रही है। फिलहाल यह पता लगाया जा रहा है कि क्या यह वास्तव में बिश्नोई गैंग का काम है या कोई शरारती तत्व इस नाम का भय दिखाकर वसूली की कोशिश कर रहा है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और भविष्य की रणनीति

​धमकी की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने विक्रम मेवाड़ा और उनके परिजनों की सुरक्षा में इजाफा कर दिया है। उनके निवास और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पुलिस बल के साथ-साथ निजी सुरक्षा गार्डों की भी तैनाती की गई है। पुलिस की अलग-अलग टीमें कॉल ट्रेस करने और संभावित संदिग्धों की धरपकड़ के लिए काम कर रही हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर पुलिस अभी बहुत अधिक जानकारी साझा करने से बच रही है ताकि जांच प्रभावित न हो। इस घटना ने एक बार फिर व्यापारियों के बीच सुरक्षा और साइबर निगरानी को लेकर नई बहस छेड़ दी है।


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