Bihar LJP (R) Violence: मुजफ्फरपुर, बिहार: विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के प्रचार के आखिरी दिन, मंगलवार 4 नवंबर 2025 को मुजफ्फरपुर जिले के पारू विधानसभा क्षेत्र में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) [LJP (R)] के अध्यक्ष चिराग पासवान को अपनी ही जनसभा में भारी हंगामे और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। मानिकपुर स्थित हाई स्कूल में आयोजित सभा में LJP अध्यक्ष चिराग पासवान के लगभग पांच घंटे की देरी से पहुंचने और फिल्मी सितारे रवि किशन के अनुपस्थित रहने से गुस्साए समर्थकों ने जमकर कुर्सियां तोड़ी और सुरक्षा घेरा तोड़कर मंच तक जा पहुंचे।
जनता 11 बजे से बैठी, नेता 4 बजे पहुंचे
सूत्रों के अनुसार, पारू में यह जनसभा सुबह 11 बजे शुरू होनी थी। LJP के समर्थक और ग्रामीण मतदाता सुबह से ही अपने 'युवा नेता' को सुनने के लिए जुटे थे। सभा में रवि किशन के आने की भी उम्मीद थी, जिसने भीड़ की संख्या को बढ़ाया।
हालांकि, शाम 4 बजने तक भी LJP अध्यक्ष चिराग पासवान सभा स्थल पर नहीं पहुंचे। इस पांच घंटे के लंबे इंतजार ने भीड़ में निराशा और आक्रोश भर दिया। जब चिराग पासवान अंततः पहुंचे, तो लोगों का गुस्सा अनियंत्रित हो गया।
तोड़फोड़ और घेराबंदी ध्वस्त
भीड़ में जबरदस्त धक्का-मुक्की शुरू हुई। आक्रोशित समर्थकों ने सभा स्थल पर लगीं सैकड़ों प्लास्टिक की कुर्सियों को निशाना बनाया और उन्हें एक दूसरे पर फेंकते हुए तोड़ डाला। देखते ही देखते, पूरा मैदान टूटी कुर्सियों और धूल के गुबार से भर गया।
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गुस्साई भीड़ ने सुरक्षा व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया। ‘डी एरिया’ के पास की गई घेराबंदी को तोड़कर समर्थक सीधे मंच की ओर भागने लगे, जिससे LJP अध्यक्ष चिराग पासवान और अन्य नेताओं की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा गया। मंच पर मौजूद नेताओं को पसीना छूट गया और वे जल्दबाजी में स्थिति संभालने लगे।
LJP अध्यक्ष को सिर्फ 5 मिनट में खत्म करना पड़ा भाषण
भीड़ को बेकाबू होते देख, LJP अध्यक्ष चिराग पासवान मुश्किल से 5 मिनट तक मंच पर रुके। उन्होंने जल्दबाजी में समर्थकों को संबोधित किया और पारू विधानसभा सीट से राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रत्याशी मदन चौधरी को वोट देने की अपील करते हुए तुरंत सभा स्थल से प्रस्थान कर दिया।
LJP प्रत्याशी मदन चौधरी: 'गुस्सा स्वाभाविक'
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रत्याशी मदन चौधरी ने इस घटना पर दुःख व्यक्त किया, लेकिन समर्थकों के गुस्से को सही ठहराया।
मदन चौधरी ने एक संक्षिप्त बयान में कहा, "समर्थक इतनी उम्मीद से सुबह से बैठे थे, और जब हमारे शीर्ष नेता लगभग पांच घंटे की देरी से पहुंचते हैं, तो निराशा और गुस्सा आना स्वाभाविक है। मैं इस तोड़फोड़ से दुखी हूँ, लेकिन कार्यकर्ताओं से अपील करता हूँ कि वे चुनावी प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करें।"
स्थानीय पुलिस बनी मूकदर्शक
घटना की गंभीरता के बावजूद, सभास्थल पर मौजूद स्थानीय पुलिस बल भीड़ को नियंत्रित करने में लगभग विफल रहा। सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने किसी बड़े अप्रिय घटना को टालने के लिए लाठीचार्ज या बल का प्रयोग नहीं किया, लेकिन इस दौरान हुई सार्वजनिक संपत्ति की तोड़फोड़ और सुरक्षा घेरा तोड़ने के मामले में किसी के खिलाफ तत्काल कोई एफआईआर या गिरफ्तारी की जानकारी सामने नहीं आई है।
चुनावी दौर में नेताओं की यह 'लेट लतीफी' और भीड़ प्रबंधन में प्रशासनिक विफलता, बिहार की चुनावी रैलियों में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
थम गया चुनाव प्रचार