Dhaka Lockdown। बांग्लादेश की राजधानी ढाका एक बार फिर गहरे राजनीतिक संकट के कगार पर खड़ी है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की विघटित हो चुकी पार्टी अवामी लीग द्वारा आगामी 13 नवंबर को प्रस्तावित Dhaka Lockdown विरोध प्रदर्शन के आह्वान ने पूरे देश में महा-विस्फोटक तनाव पैदा कर दिया है। इस संभावित हिंसक प्रदर्शन से पहले, ढाका की सड़कों को वस्तुतः एक पुलिस छावनी में बदल दिया गया है, जो वर्तमान बांग्लादेश की सुरक्षा स्थिति की नाजुकता को दर्शाता है।
इस अभूतपूर्व सुरक्षा अभ्यास का केंद्र बिंदु अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस का आधिकारिक निवास (जमुना गेस्ट हाउस) रहा है। यूनुस के घर के बाहर रैपिड एक्शन बटालियन (RAB), दंगा-रोधी बल (Anti-Riot Units), और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है, जो यह स्पष्ट करता है कि सरकार Dhaka Lockdown के दौरान किसी भी तरह की अराजकता को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

7,000 सुरक्षाकर्मियों का 'निवारक प्रदर्शन'
ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (DMP) के सूत्रों के अनुसार, शनिवार (8 नवंबर, 2025) को लगभग 7,000 पुलिसकर्मियों ने शहर के 142 प्रमुख और संवेदनशील स्थानों पर यह समन्वित अभ्यास किया। पुलिस ने आधिकारिक तौर पर इसे किसी भी आपात स्थिति के लिए "नियमित सुरक्षा कवायद" बताया है। हालांकि, एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्वीकार किया कि इस 'मेगा ड्रिल' का मुख्य उद्देश्य 13 नवंबर के विरोध प्रदर्शनों से पहले प्रदर्शनकारियों को एक कड़ा संदेश देना था। Dhaka Lockdown की घोषणा से पहले, यह अभ्यास आगामी हिंसक विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए एक पूर्व-निवारक उपाय था।
यह भी पढ़ें: Tariff Authority: सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप का बड़ा कानूनी इम्तिहान, राष्ट्रपति की शक्तियों पर फैसला संभव
Dhaka Lockdown के पीछे का विशाल एजेंडा
अवामी लीग के वरिष्ठ नेता जहांगीर कबीर नानक ने 13 नवंबर को Dhaka Lockdown आंदोलन की घोषणा की है। इस आंदोलन का समय विशेष रूप से चुना गया है। यह तारीख उस समय के आसपास है जब अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT-BD) पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ कथित मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में फैसले की तारीख की घोषणा कर सकता है।
अवामी लीग के विरोध प्रदर्शनों का मुख्य लक्ष्य यूनुस प्रशासन पर दबाव बनाना, अपने गिरफ्तार किए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई सुनिश्चित करना और पार्टी की छात्र विंग पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाना है। वे यूनुस सरकार के "कुशासन" और "तानाशाही" का आरोप लगाते हुए Dhaka Lockdown के जरिए अपनी मांगें मनवाना चाहते हैं।
यूनुस सरकार की महा-विस्फोटक चेतावनी
अंतरिम सरकार ने अवामी लीग के आंदोलन को पूरी सख्ती से कुचलने की स्पष्ट चेतावनी दी है। मोहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव, शफीकुल आलम, ने एक महा-विस्फोटक बयान जारी करते हुए कहा कि:
"अवामी लीग अपने मौजूदा स्वरूप में एक फासीवादी पार्टी है। इस फासीवादी पार्टी को बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति किसी भी कीमत पर नहीं दी जाएगी। सामूहिक हत्यारी और तानाशाह शेख हसीना के आदेश पर रैली, सभा या जुलूस आयोजित करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून प्रवर्तन एजेंसियों की पूरी सख्ती का सामना करना पड़ेगा।"
यह सख्त रुख बांग्लादेश की सुरक्षा स्थिति को और अधिक अस्थिर कर सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर हिंसा की संभावना को बढ़ाता है। बांग्लादेश की सुरक्षा स्थिति इस समय बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है।
सेना की वापसी और बढ़ती अस्थिरता
यह सुरक्षा अभियान उस पृष्ठभूमि में हो रहा है जब तीन दिन पहले ही सेना ने अपनी 60,000 तैनात टुकड़ियों में से आधी को वापस बुला लिया है। इस कदम ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी पुलिस पर डाल दी है।
इस बीच, एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट, बीएनपी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी जैसे विरोधी राजनीतिक समूह भी अवामी लीग के विरोध कार्यक्रम का प्रतिवाद करने के लिए सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। इस प्रकार, 13 नवंबर को ढाका की सड़कों पर यूनुस सरकार, अवामी लीग और अन्य विरोधी समूहों के बीच Dhaka Lockdown के कारण विनाशकारी टकराव की आशंका है, जो बांग्लादेश की सुरक्षा स्थिति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। यह चिंताएँ बांग्लादेश की सुरक्षा स्थिति को लेकर सरकार और नागरिकों दोनों में व्याप्त हैं।