रामपुर/उत्तरप्रदेश (Uttarakhand Tehelka)। शुक्रवार को BalDiwas (बाल दिवस) के अवसर पर आयोजित समारोह बच्चों की उमंग, रचनात्मकता और प्रतिभा से सराबोर रहा। सुबह की हल्की ठंडक और रंग-बिरंगी सजावट से सजे विद्यालय प्रांगण में जब बच्चे अपनी खिलखिलाती मुस्कानों के साथ पहुंचे, तो पूरा वातावरण मानो किसी उत्सव के फूलों की तरह महक उठा।

"बच्चे खिलते फूल हैं, देश की आशा और मूल हैं"—इस प्रेरक संदेश के साथ कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और बच्चों के साथ केक काटकर की गई। यह दिन बच्चों के अधिकारों, देखभाल और शिक्षा के प्रति समर्पण का प्रतीक था, और स्कूल ने इसे यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

Shubh

​प्रधानाचार्य का प्रेरणादायक संबोधन: लक्ष्य, अनुशासन और सपनों का मार्ग

​कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक क्षण वह रहा जब प्रधानाचार्य महेश चन्द्रा ने बच्चों को संबोधित करते हुए करियर निर्माण और उज्ज्वल भविष्य के लिए विशेष "सुनहरे नियम" बताए। प्रधानाचार्य ने अपने संबोधन में कहा, "बच्चों, आपका आज का हर कदम आपके कल की दिशा तय करता है। लक्ष्य स्पष्ट हों, मेहनत ईमानदार हो और नीयत हमेशा नेक हो—तो सफलता आपके कदम चूमती है।" उन्होंने समय की कीमत समझने, अच्छे मित्र चुनने, और भय से नहीं, अपने सपनों से मार्गदर्शन लेने पर ज़ोर दिया।


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​उनके द्वारा बताए गए कुछ प्रमुख नियम, जो हर बच्चे के लिए अनिवार्य हैं, वे थे:

  • ​लक्ष्य तय करो और उसे छोटे-छोटे कार्यों में बांटकर पूरा करो।
  • ​समय का सदुपयोग करो और ज़रूरत पड़ने पर ‘ना’ कहना सीखो।
  • ​मोबाइल और अनावश्यक स्क्रीन टाइम से दूरी बनाओ।
  • ​हर क्षेत्र में मेहनत को प्राथमिकता दो।
  • ​असफलता से डरने के बजाय, उससे सीखकर फिर आगे बढ़ो।
BalDiwas

BalDiwas पर प्रधानाचार्य का यह दूरदर्शी संबोधन बच्चों के मन में आत्मविश्वास, अनुशासन और बड़े सपने देखने का बीज बो गया, जिससे BalDiwas समारोह को एक गहन शैक्षिक अर्थ मिला।

​योग, नृत्य और सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत समायोजन

​मंच संचालन का जिम्मा शिक्षक पवन और दयाराम ने बखूबी संभाला। कार्यक्रम की शुरुआत योगा लॉकेट से हुई, जिसमें शिक्षक राजेंद्र के निर्देश में सूर्य नमस्कार एवं विभिन्न योगासन प्रस्तुत किए गए। स्वास्थ्य और आध्यात्मिकता का यह सुंदर संगम सभी के लिए प्रेरणादायक रहा।

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​इसके बाद कक्षा-वार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की झड़ी लग गई, जिसने BalDiwas के रंगमंच को जीवंत कर दिया:

  • ​एन.सी. के मासूम बच्चों ने “नाच मेरी जान” गीत पर भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
  • ​एल.के.जी. (A+B) का “बॉलीवुड मिक्स डांस” आकर्षण का केंद्र बना।
  • ​यू.के.जी. (A) का “मेरा वाला नृत्य” और यू.के.जी. (B) का राजस्थानी लोकनृत्य “बावरे” ने दर्शकों का मन मोह लिया।
  • शिक्षिका ​संगीता व शिवाली के निर्देशन में हुआ पहाड़ी नृत्य सांस्कृतिक विविधता का सुंदर उदाहरण बना।
  • ​कक्षा 5(B) का दमदार “जूता जापानी” सहित अन्य सभी क्षेत्रीय नृत्यों ने विद्यालय में तालियों की गूंज भर दी।

शिक्षिका ​विंद के मार्गदर्शन में बच्चों द्वारा प्रस्तुत आत्मरक्षा तकनीकों ने सुरक्षा और सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण संदेश दिया।

​खेल, हस्तकला और सामूहिक प्रयास: BalDiwas की पूर्णता

​बच्चों के लिए अनेक मनोरंजक खेलों का आयोजन किया गया, जैसे—छल्ला फाको, बॉल पिरामिड चैलेंज, लकी ड्रा, गुब्बारा फोड़ो, और डार्ट फ्लोडो। इन खेलों में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पूरा विद्यालय हंसी और खुशी से गूंज उठा।

​इस BalDiwas पर मिट्टी के पॉट, दीये, गुल्लक और अन्य हस्तनिर्मित वस्तुओं को बनाने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। दिनभर किए गए इस अभ्यास का परिणाम बच्चों द्वारा लगाई गई अनूठी और आकर्षक हस्तकलाओं की प्रदर्शनी में देखने को मिला, जो उनकी कल्पनाशीलता और कौशल का अद्भुत प्रमाण थी।

​स्वागत व्यवस्था और प्रबंधन का दायित्व शिक्षक राकेश, अखिलेश, सुनील और रोहन ने बखूबी निभाया, जबकि सजावट का कार्य शिक्षका मनीषा और अन्य शिक्षिकाओं ने समर्पण से पूरा किया। अंत में अख्तर ने सभी बच्चों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा, “BalDiwas हमें यह याद दिलाता है कि बच्चे ही हमारे देश का भविष्य हैं। उनकी मुस्कान हमारे जीवन की सबसे बड़ी खुशी है।” पूरे विद्यालय परिवार ने इस BalDiwas को बच्चों के लिए वास्तव में अविस्मरणीय और प्रेरणादायक बना दिया।

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