सीमांत क्षेत्र खटीमा स्थित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में आज 12 फरवरी 2026 को एचबी पैथी कार्यक्रम के अंतर्गत एक विशेष स्वास्थ्य जागरूकता एवं जांच शिविर संपन्न हुआ। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किशोर अवस्था में प्रवेश कर रहे विद्यार्थियों को उन गंभीर अनुवांशिक बीमारियों के प्रति सचेत करना था जो जीवन पर्यंत स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम ने कक्षा 9 और कक्षा 10 के छात्र-छात्राओं को विस्तार से रक्त विकारों की बारीकियों के बारे में समझाया। स्वास्थ्य विभाग की इस सक्रियता से विद्यालय के बच्चों में अपने शरीर और स्वास्थ्य के प्रति एक नई समझ विकसित हुई है।

रक्त विकारों की पहचान और वैज्ञानिक परीक्षण

शिविर के दौरान केवल सैद्धांतिक जानकारी ही प्रदान नहीं की गई बल्कि व्यावहारिक कदम उठाते हुए कक्षा 9 के सभी विद्यार्थियों का थैलेसीमिया परीक्षण किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि समय रहते जांच कराने से भविष्य में होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इस दौरान स्वास्थ्य टीम के सदस्यों कमलेश मिश्रा, सोनम गिनवाल और अंजली काण्डपाल ने बच्चों को व्यक्तिगत रूप से परामर्श दिया। टीम ने विद्यार्थियों को ऐसी विशेष पुस्तकें भी भेंट कीं जिनमें अनुवांशिक रोगों के होने के कारण और उनके प्रभावी समाधानों का विस्तृत विवरण दिया गया है ताकि बच्चे घर जाकर अपने परिजनों को भी इस विषय में शिक्षित कर सकें।

थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया का प्रभाव

विशेषज्ञ कमलेश मिश्रा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि थैलेसीमिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में हीमोग्लोबिन के निर्माण की प्रक्रिया बाधित हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है और व्यक्ति निरंतर थकान महसूस करता है। वहीं विज्ञान शिक्षक रत्नाकर पाण्डेय ने सिकल सेल एनीमिया की गंभीरता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस विकार में लाल रक्त कोशिकाएं अपना गोल आकार छोड़कर हंसिया जैसी हो जाती हैं जो नसों में रक्त के प्रवाह को रोक सकती हैं। यह स्थिति न केवल दर्दनाक होती है बल्कि शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता को भी कम कर देती है।

हीमोफीलिया की चुनौती और क्लॉटिंग फैक्टर

रक्त विकारों की श्रृंखला में हीमोफीलिया पर चर्चा करते हुए यह बताया गया कि यह एक अत्यंत संवेदनशील स्थिति है। रत्नाकर पाण्डेय ने समझाया कि सामान्य चोट लगने पर भी जब रक्त का बहना बंद नहीं होता, तो वह हीमोफीलिया के लक्षण हो सकते हैं। इसका मुख्य कारण रक्त में मौजूद 'क्लॉटिंग फैक्टर' नामक प्रोटीन की अनुपस्थिति है। ऐसी स्थिति में छोटी सी दुर्घटना भी जानलेवा हो सकती है। विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री प्रमोद कुमार पांडेय ने स्वास्थ्य विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के ज्ञानवर्धक सत्र विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।


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