उत्तराखंड के सबसे चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से उपजे वीआईपी ऑडियो विवाद ने एक बार फिर राज्य की राजनीति और पुलिस महकमे में हलचल तेज कर दी है। हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक परमेंद्र डोबाल ने इस मामले में बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उनकी पूर्व महिला सहयोगी उर्मिला सनावर के खिलाफ दर्ज मुकदमों की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन कर दिया है। यह मामला तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब अंकिता भंडारी हत्याकांड में 'वीआईपी' शब्द के इर्द-गिर्द लंबे समय से न्याय की मांग उठ रही है। अब पुलिस प्रशासन ने इस विवाद से जुड़ी कड़ियों को सुलझाने के लिए एक समर्पित टीम को मैदान में उतारा है।

​इस नवगठित एसआईटी का नेतृत्व एसपी सिटी अभय कुमार सिंह को सौंपा गया है। उनकी देखरेख में यह टीम न केवल साक्ष्यों का मिलान करेगी बल्कि उन तमाम कड़ियों को भी जोड़ने का प्रयास करेगी जो अब तक अलग-अलग थानों की फाइलों में दबी हुई थीं। जांच टीम की संरचना को काफी संतुलित रखने का प्रयास किया गया है। इसमें कुल सात सदस्यों को शामिल किया गया है जिनमें दो ऐसे निरीक्षक शामिल हैं जिन्हें जटिल और हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच का लंबा अनुभव प्राप्त है। एसएसपी ने जांच टीम को सख्त हिदायत दी है कि मुकदमों का निस्तारण पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाए ताकि किसी भी स्तर पर पक्षपात के आरोप न लग सकें। इससे पहले जिले में विनय त्यागी हत्याकांड के लिए भी इसी तरह की विशेष टीम गठित की जा चुकी है जो जिले में अपराध नियंत्रण की गंभीरता को दर्शाती है।

​उर्मिला सनावर के खिलाफ दर्ज मामलों का दायरा काफी विस्तृत है जो हरिद्वार जिले के अलग-अलग कोनों तक फैला हुआ है। पुलिस के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार उनके विरुद्ध कोतवाली ज्वालापुर, कोतवाली रानीपुर, थाना बहादराबाद और थाना झबरेड़ा में विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमे पंजीकृत हैं। इन चारों थानों में दर्ज मामलों की प्रकृति एक-दूसरे से जुड़ी हुई मानी जा रही है। यही कारण है कि एसएसपी ने इन सभी प्रकरणों को एक सूत्र में पिरोकर जांच करने का निर्णय लिया है। पुलिस का मानना है कि जब तक सभी मामलों की जांच एक केंद्रित टीम के पास नहीं होगी तब तक इस जटिल विवाद की तह तक पहुंचना संभव नहीं होगा। अब एसआईटी इन सभी थानों से केस डायरी अपने कब्जे में लेकर नए सिरे से गवाहों और सबूतों का विश्लेषण करेगी।

​एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट कर दिया है कि एसआईटी के गठन का प्राथमिक उद्देश्य प्रभावी पैरवी और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। वीआईपी ऑडियो प्रकरण के कारण पुलिस की कार्यप्रणाली पर जनता और विपक्ष की लगातार नजर बनी हुई है। ऐसे में एक मजबूत चार्जशीट तैयार करना और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाना एसपी सिटी अभय सिंह के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। राजनीतिक रसूख वाले व्यक्तियों का नाम इस मामले से जुड़ा होने के कारण पुलिस पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी है लेकिन विभाग का दावा है कि कानून की प्रक्रिया बिना किसी भेदभाव के अपना काम करेगी। आने वाले दिनों में एसआईटी की यह पड़ताल कई बड़े खुलासे कर सकती है जो राज्य की सियासी दिशा को भी प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।


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