असम के संगीत जगत के बेताज बादशाह जुबिन गर्ग की हत्या के मामले में जो सच अब सामने आ रहा है, उसने न केवल उनके प्रशंसकों बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। असम पुलिस की विशेष जांच टीम यानी एसआईटी ने शनिवार को अदालत के सामने एक ऐसा काला सच पेश किया है, जो यह साबित करता है कि जुबिन की मौत कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि एक बेहद शातिर और ठंडे दिमाग से रची गई साजिश थी। इस पूरी साजिश के केंद्र में कोई बाहरी दुश्मन नहीं बल्कि गायक का अपना सबसे करीबी और पूर्व मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा खड़ा है। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ है कि जिस शख्स पर जुबिन ने अपनी पूरी जिंदगी का भरोसा जताया, उसी ने गायक की मेहनत की कमाई को न केवल हड़पा बल्कि उसे ठिकाने लगाने के लिए हत्या जैसा खौफनाक कदम उठा लिया।
करोड़ों का निवेश और सिंगापुर कनेक्शन
एसआईटी की जांच अधिकारी रोजी कलिता ने अदालत में जो तथ्य रखे हैं, वे बताते हैं कि मुख्य आरोपी सिद्धार्थ शर्मा ने जुबिन गर्ग के बैंक खातों से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की थी। इस गबन की गई राशि का एक बड़ा हिस्सा यानी करीब 1.1 करोड़ रुपये गुवाहाटी से दूर चायगांव स्थित एक पैकेटबंद वाटर प्लांट में निवेश किए गए थे। महावीर एक्वा नाम के इस वाटर प्लांट में किया गया यह निवेश पूरी तरह से गायक को अंधेरे में रखकर किया गया था। जांच एजेंसी का मानना है कि सितंबर 2025 में सिंगापुर में होने वाले एक बड़े कल्चरल इवेंट को लेकर जुबिन और शर्मा के बीच विवाद गहरा गया था। यह विवाद केवल पैसों तक सीमित नहीं था बल्कि यह उस सच्चाई के करीब पहुंच रहा था जिसे शर्मा सालों से छिपा रहा था। इसी भेद के खुलने के डर ने हत्या की योजना को जन्म दिया।
मनी लॉन्ड्रिंग का गहरा जाल
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधीश गौतम बरुआ ने स्पष्ट किया कि यह केवल हत्या का मामला नहीं है बल्कि इसमें बेनामी लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग का एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। अदालत ने इस बात पर चिंता जताई है कि आरोपी सिद्धार्थ शर्मा शो की मोटी फीस हमेशा नकद में लेता था ताकि उसका कोई रिकॉर्ड न रहे। आधिकारिक तौर पर केवल 57,000 रुपये प्रति माह कमाने वाला व्यक्ति अचानक करोड़ों की संपत्ति का मालिक कैसे बन गया, यह एसआईटी की जांच का सबसे अहम पड़ाव है। रोजी कलिता ने अदालत से मांग की है कि शर्मा और उसके बिजनेस पार्टनर चेतन धीरे सरिया की संपत्ति को तुरंत जब्त किया जाए क्योंकि आशंका है कि वे अदालती कार्यवाही से बचने के लिए इसे बेच सकते हैं।
अपनों के भेष में छिपे गुनहगार
इस हत्याकांड का सबसे डरावना पहलू यह है कि इसमें जुबिन के बेहद निजी सर्कल के लोग शामिल थे। पुलिस ने जिन सात आरोपियों को चिन्हित किया है, उनमें न केवल मैनेजर बल्कि उनके बैंड मेंबर, को-सिंगर और यहां तक कि उनके चचेरे भाई और पीएसओ तक के नाम शामिल हैं। इन सभी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया जा रहा है। यह मामला अब केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है बल्कि यह एक ऐसे संगठित अपराध की ओर इशारा कर रहा है जहां संगीत और कला की आड़ में काले धन को सफेद करने और विरोध करने पर अपनों का ही खून बहाने का खेल खेला गया। 17 जनवरी की तारीख अब इस केस में बेहद महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि उसी दिन आरोपियों को अपनी संपत्ति की कुर्की को लेकर जवाब देना होगा।
---समाप्त---