वाराणसी में यूपी एटीएस की टीम को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। टीम ने एक सटीक सूचना के बाद घेराबंदी करके कुख्यात नक्सली कमांडर बृजेश गंजू उर्फ गोपाल सिंह को मुठभेड़ में मार गिराया। मारा गया बृजेश झारखंड के कुख्यात उग्रवादी संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी यानी टीपीसी का बड़ा कमांडर था। उस पर सरकार ने 30 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित कर रखा था। लंबे समय से वह अपनी पहचान छुपाकर पूर्वांचल के इस इलाके में ठिकाना बनाने की फिराक में था, लेकिन मुखबिर की पक्की खबर पर पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और सरेंडर करने को कहा। खुद को घिरा देख उसने गोलियां चलानी शुरू कर दीं, जिसके बाद एटीएस की जवाबी कार्रवाई में वह मौके पर ही ढेर हो गया।

बृजेश गंजू सिर्फ यूपी या झारखंड ही नहीं, बल्कि आसपास के कई राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था। टेरर फंडिंग के एक गंभीर मामले में एनआईए ने करीब आठ साल पहले उसे वांटेड घोषित किया था। संगठन के लिए लेवी वसूलना, बड़े कारोबारियों को धमकाना और हथियारों की खरीद-फरोख्त करना उसका मुख्य काम था। सुरक्षा एजेंसियों की टीमें कई सालों से उसकी लोकेशन ट्रेस करने में लगी हुई थीं, मगर वह बार-बार अपना नाम, हुलिया और ठिकाना बदलकर बच निकलता था। बनारस जैसे घनी आबादी और संवेदनशील शहर में उसकी मौजूदगी से सुरक्षा तंत्र के कान खड़े हो गए थे।

मौके से आधुनिक हथियार और कुछ संदिग्ध सामान भी बरामद किए जाने की खबर है। जांच टीम अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि वाराणसी में उसे शरण किसने दी थी और वह यहां किसी बड़ी वारदात की साजिश रचने आया था या सिर्फ छिपने के लिए रुका था। बृजेश गंजू के मारे जाने से टीपीसी की कमर टूट गई है और उसके नेटवर्क को करारा झटका लगा है। स्थानीय स्तर पर इसे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की एक बहुत बड़ी जीत माना जा रहा है, क्योंकि इतने बड़े इनामी नक्सली का खात्मा होना पूरे इलाके में अमन-चैन के लिहाज से बेहद अहम है।


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