उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के बाजपुर क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर कुदरत की ऐसी मार पड़ी कि अन्नदाता के अरमानों पर पानी फिर गया। दोपहर करीब साढ़े ग्यारह से बारह बजे के बीच अचानक तेज आंधी और मूसलाधार बारिश के साथ भीषण ओलावृष्टि शुरू हो गई। देखते ही देखते खेतों में सफेद चादर बिछ गई। कटाई के लिए पूरी तरह तैयार खड़ी धान की बालियां टूटकर जमीन पर बिछ गईं। किसानों की आंखों के सामने कुछ ही मिनटों में महीनों की मेहनत मिट्टी में मिल गई। कई इलाकों में तो धान के साथ-साथ गन्ने की फसल पर भी कुदरत की भारी मार पड़ी है।
सैकड़ों आशियानों पर गिरी गाज
आसमान से बरसी इस आफत का दायरा बेहद बड़ा है। राजस्व विभाग की शुरुआती पड़ताल बताती है कि तहसील के 40 से ज्यादा गांव इसकी सीधी जद में आए हैं। बेरिया दौलत, बन्नाखेड़ा, हरिपुरा, बरहैनी, चंदनपुरा, महोली, मुण्डिया कला और आसपास के तमाम इलाकों में 70 से लेकर 100 फीसदी तक फसल बर्बाद होने की खबर है। खेत तो तबाह हुए ही, आंधी और ओलों के थपेड़ों से करीब 150 कच्चे मकानों की छतें उड़ गईं और दीवारें ढह गईं। इस तबाही से पांच हजार से ज्यादा लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं, जिनके सामने अब सिर छुपाने और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

रास्ते से ही प्रभावित इलाकों में पहुंचे सीएम
आपदा की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। वह हल्द्वानी से देहरादून लौट रहे थे, लेकिन जैसे ही उन्हें बाजपुर में ओलों से मचे कोहराम की सूचना मिली, उन्होंने तुरंत अपने हेलीकॉप्टर का रुख बाजपुर की ओर मोड़ दिया। मुख्यमंत्री ने पहले आसमान से तबाही का मंजर देखा और फिर सीधे जमीन पर उतरकर बेरिया दौलत समेत प्रभावित गांवों के खेतों में पहुंच गए। उन्होंने गिरे हुए पौधों को अपने हाथ में उठाकर देखा और परेशान किसानों को ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि वह खुद किसान परिवार से आते हैं, इसलिए फसल खोने का दर्द उनसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता।
नुकसान के सटीक सर्वे के सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री ने मौके पर ही मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों को साफ हिदायत दी कि राहत पहुंचाने में कागजी लेटलतीफी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि यह अभी शुरुआती आंकड़ा है और शनिवार को होने वाले सघन सर्वे के बाद नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि हर एक प्रभावित किसान के खेत की पैमाइश हो, नुकसान का सही आंकलन बने और तय नियमों के तहत बिना किसी देरी के राहत राशि खातों में पहुंचे। सरकार इस मुश्किल वक्त में पूरी तरह अपने अन्नदाताओं के साथ खड़ी है।
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