किच्छा और सिरौलीकलां में कांग्रेस ने जीत का परचम लहरा दिया है। ऊधमसिंह नगर जिले की दोनों महत्वपूर्ण नगर पालिकाओं में आए चुनावी नतीजों ने क्षेत्र की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। किच्छा में जहां कांग्रेस के राजेश प्रताप सिंह ने भाजपा प्रत्याशी को 6077 वोटों के भारी अंतर से रौंद दिया, वहीं सिरौलीकलां में रशीदा बेगम ने 1773 मतों से शानदार जीत हासिल कर पहली बार पार्टी का खाता खोला। हालांकि, यह चुनाव केवल नगर निकाय का नहीं था, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक वर्चस्व और निजी साख की बहुत बड़ी जंग लड़ी जा रही थी।

​किच्छा और सिरौलीकलां के निकाय चुनाव भले ही स्थानीय स्तर के रहे हों, लेकिन इन पर दांव बहुत बड़े लगे हुए थे। इस पूरे चुनावी रण में क्षेत्र के मौजूदा कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ और भाजपा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला की राजनीतिक प्रतिष्ठा सीधे तौर पर दांव पर लगी थी। दोनों ही नेता अपने-अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक चुके थे, जिससे चुनाव प्रचार से लेकर मतदान तक माहौल बेहद गर्म बना रहा।

​चुनावी सरगर्मी मतदान के दिन उस वक्त चरम पर पहुंच गई थी जब किच्छा में तिलक राज बेहड़ और राजेश शुक्ला के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि राजेश शुक्ला के एक समर्थक ने कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ को थप्पड़ मार दिया। इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया था और कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की स्थिति बन गई थी। प्रशासन को व्यवस्था संभालने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी थी।

​मतगणना के दौरान जब दोनों सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों की भारी बढ़त के रुझान आने लगे, तो तिलक राज बेहड़ ने अपने विरोधियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने मतदान के दिन हुई घटना का सीधा जिक्र करते हुए दो टूक कहा कि "थप्पड़ की गूंज पूरे उत्तराखंड में सुनाई देगी।" बेहड़ ने स्पष्ट किया कि जनता ने इस बदसलूकी और घमंड का जवाब वोटों की चोट से दिया है।


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​चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो किच्छा में कांग्रेस के राजेश प्रताप सिंह को कुल 19,508 वोट मिले, जबकि भाजपा के संदीप अरोड़ा 13,431 वोटों पर ही सिमट गए। वहीं सिरौलीकलां में कांग्रेस की रशीदा बेगम ने निर्दलीय फरहीन जहां को 1773 वोटों से पटखनी दी, जहां भाजपा को अध्यक्ष पद का प्रत्याशी तक नहीं मिल पाया था। इस दोहरी जीत ने न केवल कांग्रेस खेमे में नया जोश भर दिया है, बल्कि स्थानीय सियासत में तिलक राज बेहड़ का सियासी कद और ज्यादा मजबूत कर दिया है।

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