रामपुर। जिले में लोगों को नौकरी और कमाई के नए मौके देने के लिए एक बहुत ही खास और अच्छा कदम उठाया गया है। जिले के जिलाधिकारी (डीएम) अजय कुमार द्विवेदी ने एक ऐसा तरीका निकाला है जिससे बेकार पड़े सरकारी वाहन अब लोगों की रोजी-रोटी का जरिया बनेंगे।
कबाड़ गाड़ी अब बनेगी दुकान
यह योजना खास तौर पर रेहड़ी-पटरी पर सामान बेचने वाले लोगों के लिए है। प्रशासन अब उन सरकारी गाड़ियों को इस्तेमाल करेगा जो बहुत पुरानी हो चुकी हैं और अब किसी काम की नहीं हैं (निष्प्रयोज्य हैं)। इन गाड़ियों को बदलकर एक चलती-फिरती दुकान या मोबाइल यूनिट का रूप दिया जाएगा।

इसकी शुरुआत एक पुरानी सरकारी एम्बुलेंस से की गई है जो जिला अस्पताल में बेकार खड़ी थी। इसे इस तरह तैयार किया जा रहा है कि जो भी लाभार्थी होगा, उसे अपना सामान बेचने के लिए एक सुरक्षित, साफ-सुथरा और व्यवस्थित ठिकाना मिल जाएगा।
सम्मानजनक कमाई का मौका
इस नई पहल से रेहड़ी-पटरी वालों को खुली जगह या सड़क किनारे गंदगी में काम नहीं करना पड़ेगा, बल्कि उन्हें एक पक्की और सम्मानजनक जगह मिल जाएगी।
इन मोबाइल यूनिट्स को शहर में ऐसी जगहों पर लगाया जाएगा जहाँ ट्रैफिक जाम न हो और जहाँ ग्राहकों का आना-जाना भी आसान हो।
अगर यह पहला प्रयोग सफल होता है, तो प्रशासन के पास ऐसे 50 से ज़्यादा बेकार पड़े सरकारी वाहन हैं, जिन्हें इसी तरह बदला जाएगा। इससे और भी बहुत से लोगों को रोजगार मिल सकेगा।
यह पहल दो बड़े काम कर रही है:
- सरकारी कबाड़ का सही इस्तेमाल करना।
- शहर को व्यवस्थित बनाना और गरीब लोगों को सम्मान के साथ कमाई का पक्का मौका देना।
डीएम का यह प्रयास दिखाता है कि प्रशासन रेहड़ी-पटरी वालों को असंगठित तरीके से बाहर निकालकर, उन्हें सुरक्षा और स्थायी आजीविका देने के लिए संवेदनशील और गंभीर है।
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