मथुरा की एक अदालत के हालिया आदेश ने उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में खलबली मचा दी है। अदालत ने फरह क्षेत्र के एक ग्राम प्रधान को फर्जी मुठभेड़ में फंसाने और उसकी टांगों में गोली मारने के गंभीर आरोपों के बाद हाथरस कोतवाली प्रभारी और एसओजी प्रभारी समेत कुल 15 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। यह पूरा मामला फरह थाना क्षेत्र के ग्राम कोह के रहने वाले ग्राम प्रधान हरेंद्र से जुड़ा है, जिनके पिता गजेंद्र सिंह ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
शिकायत के अनुसार, इसी साल 25 फरवरी की सुबह करीब चार बजे हाथरस पुलिस की टीम दीवार फांदकर हरेंद्र के घर में घुसी और उसे बुरी तरह पीटते हुए जबरन उठाकर ले गई। आरोप है कि पुलिसकर्मी घर से नकदी और मोबाइल फोन भी लूट ले गए थे। इसके बाद पुलिस ने पूरी साजिश रचते हुए रात के समय सादाबाद इलाके में एक फर्जी मुठभेड़ दिखाई, जिसमें हरेंद्र को जान से मारने की नीयत से उसकी टांगों में गोली मारी गई। इतना ही नहीं, उसे कई अन्य फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल भेज दिया गया।
इस मामले में सबसे अहम मोड़ तब आया जब पीड़ित पक्ष ने कोर्ट में पुलिस की कहानी को झुठलाने वाले पुख्ता सबूत पेश किए। अदालत के सामने घर से ले जाए जाने की सीसीटीवी फुटेज, टोल प्लाजा के रिकॉर्ड और वारदात के समय पुलिसकर्मियों की मोबाइल लोकेशन जैसे साक्ष्य रखे गए, जिनसे साफ हुआ कि पुलिस की एनकाउंटर वाली कहानी संदिग्ध थी। इन प्रमाणों के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फरह पुलिस को आदेश दिया कि वह आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू करे। वर्तमान में हरेंद्र जमानत पर बाहर है और पुलिस महकमे के उन अधिकारियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है जिन्होंने कानून की रक्षा के बजाय उसका उल्लंघन किया।