प्रशासन ने एक बार फिर अवैध कब्जों के खिलाफ अपनी सख्त नीति का परिचय दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत, जिला देवरिया के गोरखपुर ओवरब्रिज के पास स्थित हजरत शहीद सैयद अब्दुल गनी शाह बाबा की मजार पर प्रशासन का बुलडोजर चला। यह कार्रवाई उस समय शुरू हुई जब जांच में यह स्पष्ट हो गया कि मजार का निर्माण सरकारी बंजर भूमि पर किया गया था। कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के विरोध या अप्रिय घटना को रोकने के लिए मौके पर पीएसी और भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। अधिकारियों की निगरानी में मजार परिसर के भीतर रखे सामान को सुरक्षित बाहर निकाला गया और उसके बाद ढांचे को गिराने की प्रक्रिया शुरू की गई।

विधायक की शिकायत और न्यायिक आदेश का पालन

​इस पूरे प्रकरण की शुरुआत सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी की एक शिकायत से हुई थी। कुछ महीने पहले उन्होंने इस मजार के अवैध होने और सरकारी भूमि पर कब्जा करने का मुद्दा उठाया था। विधायक की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मामले की फाइलें खोली गईं और एएसडीएम कोर्ट में इसकी सुनवाई हुई। कोर्ट ने राजस्व अभिलेखों और साक्ष्यों के आधार पर संबंधित भूमि को सरकारी बंजर भूमि घोषित कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह मजार कानूनी रूप से मान्यता के योग्य नहीं है क्योंकि इसका आधार अवैध कब्जा है। इसी न्यायिक आदेश के अनुपालन में जिला प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की यह बड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की है।

1993 के राजस्व रिकॉर्ड्स और जांच की सच्चाई


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​तहसीलदार द्वारा की गई गहन जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि साल 1993 में इस बंजर भूमि को हेरफेर कर मजार और कब्रिस्तान के रूप में दर्ज कर लिया गया था। इस गड़बड़ी को पकड़ने के बाद अपर जिला शासकीय अधिवक्ता ने राजस्व संहिता के तहत अभिलेखों को दुरुस्त करने के लिए एसडीएम कोर्ट में वाद दायर किया था। जांच रिपोर्ट में यह पाया गया कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि को गलत तरीके से धार्मिक ढांचे के नाम कर दिया गया था। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और कानूनी दायरे में रहकर की जा रही है। वर्तमान में क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनी हुई है और जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी संपत्तियों पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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