उत्तर प्रदेश के इतिहास में 2 जुलाई 2020 की वो काली रात आज भी रूह कंपा देती है, जब कानपुर के बिकरू गांव में विकास दुबे के गिरोह ने पुलिस टीम पर कायराना हमला किया था। इस घटना ने न सिर्फ पुलिस महकमे को जख्म दिए, बल्कि एक ऐसी लड़की की जिंदगी भी तबाह कर दी जिसकी शादी को महज दो दिन हुए थे। खुशी दुबे, जिसकी हाथों की मेहंदी अभी रची ही थी, उसने अपने पति अमर दुबे को एनकाउंटर में खो दिया और खुद को साजिश के आरोपों के घेरे में पाया। एक नवविवाहित लड़की जिसे अपने भविष्य के सपने बुनने थे, उसे उम्र के उस पड़ाव पर जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया गया जहां उसने शायद दुनिया को ठीक से समझा भी नहीं था। ढाई साल तक कानूनी पेचीदगियों और जेल की दीवारों से जूझने के बाद जब वह बाहर आई, तो उसे लगा कि शायद अब जिंदगी पटरी पर लौटेगी, लेकिन नियति ने उसके लिए कुछ और ही भयानक लिख रखा था।
बीमारी की मार और बेबसी के वो आंसू
जेल की कालकोठरी से बाहर आने के बाद खुशी दुबे के सामने अपनी और अपने परिवार की नई जिंदगी शुरू करने की चुनौती थी। समाज के तानें और कानूनी लड़ाई के बीच अचानक उसकी मां एक जानलेवा बीमारी की चपेट में आ गई। आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुके परिवार के पास इलाज के लिए फूटी कौड़ी तक नहीं थी। कंगाली और बीमारी की दोहरी मार ने खुशी की कमर तोड़ दी। वह अपनी तड़पती हुई मां को देखने के अलावा कुछ नहीं कर पा रही थी। हर दरवाजा खटखटाने के बाद भी जब उसे कोई रास्ता नहीं मिला, तब उसकी बेबसी सोशल मीडिया के जरिए दुनिया के सामने आई। एक ऐसी लड़की जो पहले ही अपना सुहाग और अपने जीवन के कीमती साल खो चुकी थी, अब अपनी मां को खोने के डर से कांप रही थी।
अखिलेश यादव का मानवीय हस्तक्षेप और राजनीति से ऊपर उठती संवेदना
जब खुशी दुबे की इस बदहाली और उसकी मां की गंभीर स्थिति की जानकारी समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव तक पहुंची, तो उन्होंने राजनीतिक नफा-नुकसान से परे जाकर इंसानियत का परिचय दिया। अखिलेश यादव ने न केवल संवेदना प्रकट की बल्कि तुरंत अपनी टीम को निर्देश दिया कि खुशी की मां के इलाज का पूरा खर्च समाजवादी पार्टी उठाएगी। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि पैसे की तंगी के कारण किसी गरीब की जान नहीं जानी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री के इस कदम ने न केवल खुशी दुबे को एक नया जीवनदान दिया बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में संवेदना की एक नई लकीर खींच दी। इस मदद के बाद खुशी दुबे ने एक भावुक वीडियो संदेश जारी कर अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।
फरिश्ते के रूप में अखिलेश और इंसाफ की उम्मीद
वायरल वीडियो में खुशी दुबे की आंखों से गिरते आंसू उसकी आपबीती बयां कर रहे हैं। उसने हाथ जोड़कर अखिलेश यादव का आभार जताते हुए कहा कि जब अपनों और परायों सबने साथ छोड़ दिया था, तब अखिलेश यादव उसके परिवार के लिए एक फरिश्ता बनकर सामने आए। खुशी का कहना है कि अगर आज यह मदद न मिलती तो शायद वह अपनी मां को हमेशा के लिए खो देती। यह कहानी सिर्फ एक राजनीतिक मदद की नहीं है, बल्कि उस न्याय और मानवीय दृष्टिकोण की है जो अक्सर फाइलों के नीचे दब जाता है। खुशी दुबे की जिंदगी का यह तूफान फिलहाल थमता नजर आ रहा है, लेकिन समाज के लिए यह एक बड़ा सवाल छोड़ गया है कि क्या किसी के अपराध की सजा उसके पूरे परिवार को इस हद तक मिलनी चाहिए कि वह मौत और कंगाली के मुहाने पर खड़ा हो जाए
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