रामपुर के केमरी थाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है, जिसने कानून-व्यवस्था के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में खुद को बजरंग दल का नेता बताने वाला सूरज पटेल नाम का युवक पुलिसकर्मियों के सामने न केवल चिल्ला रहा है, बल्कि बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए पूरे थाने को आग लगाने की धमकी दे रहा है। यह पूरी घटना तब शुरू हुई जब सूरज पटेल रविवार को थाने में बंद एक अपराधी से मिलने की जिद पर अड़ गया। जब ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने नियम और कानून का हवाला देकर उसे रोकने की कोशिश की, तो सत्ता के नशे या संगठन के रसूख में चूर इस युवक ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दीं। सरेआम पुलिस को दी गई यह धमकी सीधे तौर पर खाकी के इकबाल को ललकारने जैसी थी, जिसे वहां मौजूद किसी शख्स ने कैमरे में कैद कर लिया।
माफीनामे का ड्रामा और पुलिस की सुस्त कार्रवाई
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, रामपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठने लगीं। ताज्जुब की बात यह है कि इतनी गंभीर धमकी और सरकारी कार्य में बाधा डालने के बावजूद पुलिस शुरुआत में नरम रुख अपनाती दिखी। एक्स पर कुछ यूजर्स के सवालों के जवाब में रामपुर पुलिस ने सफाई दी कि युवक ने लिखित और वीडियो जारी कर माफी मांग ली है। पुलिस के इस जवाब ने जनता के गुस्से को और भड़का दिया। लोगों ने सवाल उठाया कि क्या अब कोई भी थाने में आग लगाने की धमकी देकर सिर्फ एक माफीनामे के जरिए कानून के चंगुल से बच सकता है? क्या आम आदमी के लिए भी पुलिस का यही नरम रवैया रहता? करीब 30 घंटे तक चले इस 'माफीनामे के ड्रामे' ने पुलिस की छवि को खासा नुकसान पहुंचाया और ऐसा लगा मानो रसूख के आगे कानून बेबस हो गया है।
सोशल मीडिया पर फजीहत के बाद जागी पुलिस
जब मामला पुलिस के हाथ से निकलता दिखा और सोशल मीडिया पर पुलिस की जमकर किरकिरी होने लगी, तब जाकर आला अधिकारियों ने संज्ञान लिया। सोमवार रात करीब 9:44 बजे एएसपी अनुराग सिंह ने पुष्टि की कि आरोपी सूरज पटेल के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने साफ किया कि वायरल वीडियो और मौके पर मौजूद साक्ष्यों को आधार बनाकर यह कार्रवाई की गई है। हालांकि आरोपी खुद को बजरंग दल का कार्यकर्ता बता रहा है, लेकिन संगठन की ओर से इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक बचाव सामने नहीं आया है। पुलिस अब गवाहों के बयान और वीडियो की सत्यता के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है। यह मामला साफ करता है कि वर्दी के लिए अपशब्द बोलने वाले या सरकारी संस्थान को दहलाने की धमकी देने वालों पर देर से ही सही, लेकिन कानूनी शिकंजा कसता अनिवार्य है।
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