उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता जेपीएस राठौर ने रामपुर में मीडिया से मुखातिब होते हुए ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में होने वाले ऐतिहासिक परिवर्तनों का खाका खींचा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत @ 2047 के विजन को धरातल पर उतारने के लिए ग्रामीण रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 एक निर्णायक कदम साबित होगा। यह अधिनियम केवल कागजी बदलाव नहीं है बल्कि ग्रामीण भारत की पूरी कार्यप्रणाली को नया और मजबूत रूप प्रदान करने का संकल्प है। सरकार ने अब मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया है जो सीधे तौर पर काम मांगने के अधिकार को नई शक्ति प्रदान करता है। यह कदम न केवल ग्रामीण आय की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा बल्कि गांवों में टिकाऊ आजीविका और सुदृढ़ परिसंपत्तियों के निर्माण में भी बड़ी भूमिका निभाएगा।

अधिकारों की मजबूती और जवाबदेही का नया युग

​अक्सर यह आशंका जताई जाती है कि नए कानूनों से पुराने अधिकार कमजोर हो जाते हैं लेकिन राठौर ने इन भ्रांतियों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अधिनियम रोजगार के अधिकार को और अधिक धारदार बनाता है। धारा 5 (1) के तहत अब सरकार पर यह स्पष्ट वैधानिक दायित्व है कि वह हर पात्र ग्रामीण परिवार को कम से कम 125 दिनों का गारंटीकृत रोजगार उपलब्ध कराए। यदि रोजगार देने में देरी होती है तो जवाबदेही तय करने के लिए एक सख्त शिकायत निवारण तंत्र विकसित किया गया है। इसके साथ ही बेरोजगारी भत्ते के नियमों को भी सरल और न्यायपूर्ण बनाया गया है। अब पुराने जटिल प्रावधानों को हटाकर यह सुनिश्चित किया गया है कि यदि 15 दिनों के भीतर काम नहीं मिलता है तो संबंधित व्यक्ति बेरोजगारी भत्ते का हकदार होगा।

पंचायतों का सशक्तिकरण और विकेन्द्रीकृत शासन


Advertisement

​सत्ता के विकेन्द्रीकरण पर बोलते हुए जेपीएस राठौर ने कहा कि इस अधिनियम की सबसे बड़ी खूबी इसका पंचायतों पर भरोसा है। धारा 16 से 19 तक स्पष्ट रूप से पंचायतों, कार्यक्रम अधिकारियों और जिला स्तर के अधिकारियों को योजना बनाने और उसे लागू करने की शक्तियां प्रदान करती हैं। केंद्र या राज्य सरकार स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने के अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं करेगी बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर केवल समन्वय और दृश्यता सुनिश्चित की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि गांव के विकास का खाका गांव के लोग ही तैयार करें। इसमें आधुनिक तकनीक का समावेश किया गया है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश न बचे। यह प्रणाली नियम आधारित वित्तपोषण और कन्वर्जेस आधारित विकास को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करेगी।

विकसित भारत @ 2047 की दिशा में निर्णायक छलांग

​इस नए कानून का पारित होना भारत की ग्रामीण रोजगार गारंटी व्यवस्था में एक आमूलचूल परिवर्तन का प्रतीक है। राठौर ने इसे ग्रामीण सशक्तिकरण का एक रणनीतिक साधन करार दिया। वैधानिक रोजगार की अवधि में विस्तार और सहभागितापूर्ण योजना के माध्यम से सरकार समावेशी विकास की ओर बढ़ रही है। परिपूर्णता आधारित विकास यानी सेचूरेशन मॉडल को संस्थागत रूप देकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। यह अधिनियम न केवल रोजगार की गारंटी देता है बल्कि एक समृद्ध और सक्षम ग्रामीण भारत के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त करता है जो भविष्य की वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार होगा।

---समाप्त---