भारतीय पत्रकारिता जगत में कभी बड़ा नाम रखने वाले 'तहलका' मैगजीन के पूर्व मुख्य संपादक तरुण तेजपाल की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बेहद गंभीर मोड़ पर आ खड़ी हुई हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने 11 साल पुराने हाई-प्रोफाइल यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है और तेजपाल को दोषी ठहराया है। न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जामसंदेकर की पीठ ने गोवा सरकार द्वारा निचली अदालत के 2021 के बरी करने वाले फैसले के खिलाफ दायर अपील को स्वीकार करते हुए यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(f), 376(2)(k), 354A और 354B के तहत उन्हें दोषी माना है।
नवंबर 2013 में गोवा के एक पांच सितारा होटल में आयोजित 'तहलका' के कार्यक्रम के दौरान हुई इस घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। तेजपाल पर उनकी ही एक युवा महिला सहकर्मी ने होटल की लिफ्ट में दो बार यौन हमला और उत्पीड़न करने का संगीन आरोप लगाया था। पीड़िता के आरोपों और गोवा पुलिस की गहन जांच के बाद तैयार की गई लगभग तीन हजार पन्नों की चार्जशीट ने इस मामले में कई कानूनी साक्ष्य पेश किए थे। मई 2021 में जब सत्र न्यायालय ने तेजपाल को बरी किया था, तब राज्य सरकार ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने माना कि निचली अदालत ने सबूतों के बजाय घटना के बाद पीड़िता के व्यवहार पर अनुचित ध्यान केंद्रित किया था।
पत्रकारिता में तीन दशकों से अधिक का अनुभव रखने वाले तरुण तेजपाल ने साल 2000 में 'तहलका' की शुरुआत की थी। इस संस्थान ने स्टिंग ऑपरेशनों और खोजी पत्रकारिता के जरिए देश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में तहलका मचा दिया था। विशेष रूप से साल 2001 का 'ऑपरेशन वेस्ट एंड' भारतीय मीडिया इतिहास के सबसे बड़े खुलासों में गिना जाता है, जिसने रक्षा सौदों में व्याप्त भ्रष्टाचार को कैमरे पर बेनकाब किया था। तेजपाल अपनी धारदार लेखनी और बड़ी खोजी खबरों के लिए जाने जाते थे, लेकिन 2013 के इस मामले ने उनके पूरे करियर को अंधकार में धकेल दिया।
अदालत में फैसला सुनाए जाने के दौरान तरुण तेजपाल व्यक्तिगत रूप से मौजूद थे। उनके वकील ने कोर्ट में तर्क रखा कि तेजपाल ने हमेशा कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया है और उनका पासपोर्ट भी अधिकारियों के पास जमा रहा है। हालांकि, अभियोजन पक्ष और गोवा सरकार की ओर से मजबूती से पैरवी करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कड़े कदम उठाने का आग्रह किया। 2021 में मिली अस्थायी राहत के बाद, हाईकोर्ट के इस फैसले ने कानून और न्याय के तराजू में इस चर्चित मामले को एक बार फिर सबसे अहम बिंदु पर ला दिया है।
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