ऊधमसिंहनगर के पैगा निवासी किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के मामले में पुलिस महकमे के भीतर बड़ी सर्जरी शुरू हो गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने इस प्रकरण में बरती गई घोर लापरवाही और उदासीनता को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अख्तियार किया है। एसएसपी के आदेश पर आईटीआई थानाध्यक्ष कुन्दन सिंह रौतेला और उपनिरीक्षक प्रकाश बिष्ट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इन दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि इन्होंने पीड़ित पक्ष की शिकायतों को नजरअंदाज किया और कर्तव्य पालन में शिथिलता बरती। दोनों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही प्रस्तावित कर दी गई है और निलंबन अवधि के दौरान उन्हें पुलिस लाइन में ही डेरा डालना होगा।
पूरी चौकी पर गिरी गाज और दस पुलिसकर्मी लाइन हाजिर
कार्रवाई की आंच केवल थाना स्तर तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरी पैगा चौकी को ही खाली कर दिया गया है। एसएसपी ने अनुशासन का डंडा चलाते हुए चौकी प्रभारी जितेन्द्र कुमार समेत वहां तैनात सभी 10 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है। लाइन हाजिर किए गए कर्मियों में अ०उ०नि० सोमवीर सिंह, मु०आरक्षी शेखर बनकोटी और आरक्षी भूपेन्द्र सिंह समेत पूरी टीम शामिल है। इन सभी को तत्काल रुद्रपुर पुलिस लाइन में आमद करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई जिले के इतिहास में हाल के समय की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई मानी जा रही है, जिसने खाकी के गलियारों में सन्नाटा पसरा दिया है।
अनुशासनिक शर्तें और जीवन निर्वाह भत्ते का कड़ा प्रावधान
निलंबन की इस प्रक्रिया में नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया गया है। निलंबित अधिकारियों को मूल नियम-53 के तहत केवल अर्द्ध औसत वेतन के बराबर जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। इसके लिए भी एक कड़ी शर्त रखी गई है कि संबंधित अधिकारी को यह प्रमाणित करना होगा कि वह किसी अन्य निजी व्यवसाय या सेवायोजन में लिप्त नहीं है। साथ ही, निलंबन के दौरान उन्हें पुलिस लाइन छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। एसएसपी ने साफ कर दिया है कि जनता की सुरक्षा के प्रति उत्तरदायी पुलिसकर्मी अगर अपनी जिम्मेदारी से भागेंगे या लापरवाही करेंगे, तो उनके साथ कोई रियायत नहीं बरती जाएगी।
उच्च स्तरीय जांच और एसपी क्राइम को कमान
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ तक जाने के लिए एसएसपी ने एक विस्तृत और गहन प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैं। इस जांच की जिम्मेदारी एसपी क्राइम एवं टीआरजी, ऊधमसिंहनगर को सौंपी गई है। जांच अधिकारी को एक निश्चित समयसीमा के भीतर अपनी तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस जांच में यह देखा जाएगा कि किसान को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने में किन-किन कर्मियों की सीधी भूमिका थी और क्या उच्च स्तर पर भी किसी ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध रखी थी। यह जांच रिपोर्ट ही तय करेगी कि क्या निलंबित कर्मियों पर आने वाले समय में कोई बड़ी कानूनी गाज गिरेगी।
मुख्यमंत्री की नजर और कुमाऊं आयुक्त की समानांतर जांच
पुलिस विभाग की इस कार्रवाई के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मामले में सीधा हस्तक्षेप किया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत को इस पूरे प्रकरण की जांच सौंपी गई है। एक तरफ जहां पुलिस विभाग अपनी आंतरिक जांच कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक स्तर पर हो रही यह जांच उन कड़ियों को जोड़ेगी जिन्हें दबाने की कोशिश की गई। मृतक किसान के पिता ने पुलिस पर फर्जी मुकदमों की धमकी देने के जो गंभीर आरोप लगाए हैं, अब वे भी जांच के घेरे में होंगे। शासन की इस सक्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुखवंत सिंह की मौत का हिसाब हर हाल में लिया जाएगा।
---समाप्त---