उत्तराखंड की शांत वादियों में भविष्य बनाने का सपना देख रहे युवाओं के साथ खिलवाड़ करने वाले एक बेहद शातिर और हाई-टेक गिरोह का अंत हो गया है। देहरादून के महादेव डिजिटल जोन में जब एसटीएफ की टीम ने छापा मारा तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए। परीक्षा केंद्र के यूपीएस रूम में फर्श के नीचे एक खुफिया भूमिगत चैंबर बनाया गया था जिसे बाहर से पहचान पाना नामुमकिन था। इस गुप्त सुरंग नुमा कमरे में लैपटॉप और हाई-टेक राऊटर का पूरा जाल बिछाया गया था जिसके माध्यम से अभ्यर्थियों के कंप्यूटर सिस्टम का रिमोट एक्सेस लिया जा रहा था। यह महज एक साधारण नकल नहीं थी बल्कि तकनीक के साथ किया गया एक सुनियोजित अपराध था जिसने पूरी परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर गहरा प्रहार किया है।

10 लाख में बिक रहा था युवाओं का भविष्य

​जांच में यह कड़वा सच सामने आया है कि यह गिरोह मेधावी छात्रों के हक पर डकैती डाल रहा था। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार अभियुक्तों ने कबूल किया कि वे प्रत्येक अभ्यर्थी से पास कराने के नाम पर दस-दस लाख रुपये की मोटी रकम वसूल रहे थे। नीतिश कुमार और भास्कर नैथानी जैसे सफेदपोश अपराधी तकनीक को हथियार बनाकर उन युवाओं के सपनों का सौदा कर रहे थे जो दिन-रात मेहनत कर सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं। यह गिरोह न केवल आर्थिक उगाही कर रहा था बल्कि प्रदेश की साख को भी बट्टा लगा रहा था। इनके पास से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इस बात का प्रमाण हैं कि नकल माफिया अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर डिजिटल अपराध की ओर रुख कर चुका है।

नकल विरोधी कानून की धमक और जेल की सलाखें

​उत्तराखंड सरकार द्वारा हाल ही में लागू किया गया सख्त नकल विरोधी कानून अब इन अपराधियों के लिए काल साबित होने वाला है। पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम 2023 की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इस कानून की कठोरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें दोषियों के लिए उम्रकैद तक का प्रावधान है। महादेव डिजिटल जोन को पूरी तरह सील कर दिया गया है और अब जांच की आंच उन सफेदपोशों तक पहुंचने वाली है जो इस काले कारोबार के असली मास्टरमाइंड हैं। एसटीएफ की इस त्वरित कार्रवाई ने संदेश साफ कर दिया है कि देवभूमि में नकल के सौदागरों के लिए अब कोई जगह नहीं बची है।


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