उत्तराखंड के सबसे चर्चित और संवेदनशील अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। इस बार केंद्र में अभिनेत्री उर्मिला सनावर हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया के जरिए 'VIP' के चेहरे से नकाब हटाने का दावा कर शासन और प्रशासन की नींद उड़ा दी थी। बुधवार को देहरादून में SIT के सामने पेश हुई उर्मिला सनावर से पुलिस ने लगभग छह घंटे तक मैराथन पूछताछ की। इस पूछताछ के दौरान जांच टीम ने उन तमाम कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जो उर्मिला के दावों और पूर्व विधायक के कथित ऑडियो क्लिप से जुड़ी हुई हैं। यह मामला अब केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है।

दो नई रिकॉर्डिंग ने बढ़ाई जांच की तपिश और सियासत की हलचल

पूछताछ के दौरान सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उर्मिला सनावर ने जांच टीम के सामने दो नई और बेहद गोपनीय ऑडियो रिकॉर्डिंग पेश कर दीं। बताया जा रहा है कि इन नई रिकॉर्डिंग में कुछ ऐसी बातचीत दर्ज है जो पूर्व में वायरल हुई क्लिप्स के दावों को और अधिक मजबूती प्रदान करती हैं। SIT ने इन साक्ष्यों को अपने कब्जे में ले लिया है और अब इन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। एक तरफ जहां संबंधित नेता इन ऑडियो को बनावटी और फर्जी बता रहे हैं, वहीं उर्मिला सनावर का अडिग रुख यह संकेत दे रहा है कि उनके पास कुछ ऐसे पुख्ता सबूत हैं जिन्हें नजरअंदाज करना पुलिस के लिए नामुमकिन होगा। इन नई कड़ियों के जुड़ने के बाद अब जांच की दिशा उन रसूखदारों की तरफ मुड़ सकती है जो लंबे समय से पर्दे के पीछे छिपे हुए थे।

दावों और कानूनी कार्रवाई के बीच फंसा न्याय का सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल पुलिस महकमे में बल्कि सरकार के भीतर भी खलबली पैदा कर दी है। उर्मिला सनावर के खिलाफ पहले ही भ्रामक सूचना फैलाने और माहौल बिगाड़ने की साजिश के आरोप में मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने SIT के सामने पेश होकर अपने बयानों पर टिके रहने का साहस दिखाया है। पुलिस अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इन ऑडियो क्लिप्स का असली स्रोत क्या है और क्या इसके पीछे कोई सोची-समझी राजनीतिक साजिश काम कर रही है या फिर यह वास्तव में उस 'VIP' को बेनकाब करने की कोशिश है जिसका जिक्र रिजॉर्ट कांड के पहले दिन से हो रहा है। उत्तराखंड की जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह जांच किसी तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचेगी।

सोशल मीडिया के दावों से लेकर फॉरेंसिक लैब तक पहुंचती जंग

अब पूरी लड़ाई साक्ष्यों की प्रमाणिकता पर आकर टिक गई है। उर्मिला सनावर द्वारा सौंपी गई नई रिकॉर्डिंग की बारीकी से जांच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया सके कि आवाजों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या तकनीकी हेरफेर नहीं किया गया है। उत्तराखंड की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया के गलियारों तक, आज बुधवार को भी इस केस की चर्चाएं हर जुबां पर हैं और जनता बस इसी बात का इंतजार कर रही है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में क्या निकलकर आता है। यदि ये रिकॉर्डिंग असली पाई जाती हैं, तो यह न केवल अंकिता हत्याकांड में एक निर्णायक मोड़ साबित होगा, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी बड़े इस्तीफे और बदलाव की वजह बन सकता है। SIT की यह लंबी पूछताछ केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह उस दबाव का नतीजा थी जो जनता के बीच से लगातार उठ रहा था।


Advertisement

---समाप्त---