उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आध्यात्मिक जगत और पुलिस प्रशासन के बीच जारी संघर्ष अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरुद्ध दर्ज पोक्सो एक्ट के मामले में एक ऐसी तस्वीर ने दस्तक दी है, जिसने पूरी कानूनी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को ही दांव पर लगा दिया है। इस तस्वीर के सार्वजनिक होने के बाद से ही न केवल संत समाज बल्कि आम जनमानस में भी जांच की निष्पक्षता को लेकर गंभीर चर्चाएं छिड़ गई हैं। यह मामला अब केवल आरोपों और धाराओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सीधे तौर पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की भूमिका पर उंगली उठाई गई है।

गहरे और पुराने रिश्तों का प्रमाण

​शंकराचार्य द्वारा जारी की गई फोटो में 2011 बैच के तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा एक साधारण प्लास्टिक के स्टूल पर रखे केक को काटते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस तस्वीर में सबसे चौंकाने वाला पहलू वह व्यक्ति है जो उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। दावा किया गया है कि यह शख्स वही आशुतोष है, जिसने शंकराचार्य पर यौन शोषण जैसी गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि यह फोटो महज इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह उन गहरे और पुराने रिश्तों का प्रमाण है जो इस पूरे मामले को संदिग्ध बना देते हैं।

शामली से प्रयागराज तक के रिश्तों का खुलासा

​विवाद की जड़ें तलाशते हुए शंकराचार्य ने तर्क दिया है कि शिकायतकर्ता आशुतोष शामली जनपद के कांधला का रहने वाला है। गौर करने वाली बात यह है कि आईपीएस अजय पाल शर्मा पूर्व में शामली के पुलिस अधीक्षक (एसपी) रह चुके हैं। स्वामी जी का आरोप है कि इसी पुरानी जान-पहचान और प्रगाढ़ संबंधों के कारण आशुतोष ने पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर यह पूरी साजिश रची है। उनका कहना है कि एक 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' के संरक्षण में उनके खिलाफ फर्जी साक्ष्य तैयार किए जा रहे हैं ताकि आध्यात्मिक गरिमा को ठेस पहुंचाई जा सके।

जांच की निष्पक्षता पर सवाल

​आईपीएस अजय पाल शर्मा वर्तमान में प्रयागराज में एडिशनल पुलिस कमिश्नर के पद पर तैनात हैं और वे ही इस हाई-प्रोफाइल केस की निगरानी कर रहे हैं। जब जांच की कमान संभालने वाला अधिकारी ही शिकायतकर्ता का मित्र हो, तो न्याय की उम्मीद पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। संत समाज और शंकराचार्य के समर्थकों का कहना है कि जिस अधिकारी की निगरानी में गिरफ्तारी और साक्ष्य संकलन का काम होना है, यदि उसका झुकाव पहले से ही एक पक्ष की ओर है, तो सत्य कभी सामने नहीं आ पाएगा। इस फोटो ने प्रयागराज पुलिस को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है।


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गंभीर आरोपों के बीच फंसा मामला

​पोक्सो एक्ट जैसे संवेदनशील मामले में जहां साक्ष्यों की सुचिता अत्यंत आवश्यक होती है, वहां इस 'केक वाली फोटो' ने मामले को पूरी तरह उलझा दिया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इसे अपने विरुद्ध एक राजनीतिक और प्रशासनिक गठबंधन का हिस्सा मान रहे हैं। जहां पुलिस विभाग इसे नियमानुसार की जा रही कार्रवाई बता रहा है, वहीं दूसरी ओर शंकराचार्य द्वारा पेश किए गए इन सबूतों ने यह संदेश दिया है कि मामला कानून से ज्यादा आपसी रंजिश और प्रभाव का शिकार हो सकता है। अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद शासन इस मामले की जांच किसी अन्य एजेंसी को सौंपता है या नहीं।

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