सब कुछ किसी सोची-समझी पटकथा की तरह चल रहा था। बाजार की भीड़, रुपयों का शोर और उन सबके बीच बड़ी सफाई से खपाए जा रहे 500-500 के चमचमाते नोट। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 23 फरवरी 2026 की उस दोपहर नरौरा के एक सब्जी विक्रेता के हाथ में जब वो गुलाबी-हरा नोट आया, तो उसके स्पर्श ने कुछ ऐसा संकेत दिया जिसने उत्तर प्रदेश के एक बड़े जाली नोट नेटवर्क की नींव हिला दी। उस दुकानदार की एक छोटी सी शंका ने पुलिस के सामने वो राज खोल दिया जो घर की चारदीवारी के भीतर बड़ी खामोशी से पनप रहा था। बुलंदशहर पुलिस ने जब घेराबंदी की, तो सामने आए वो चेहरे जो साधारण प्रिंटर से देश की अर्थव्यवस्था को चुनौती दे रहे थे।

साधारण प्रिंटर और नोट छापने का खौफनाक खेल

​पुलिस की गिरफ्त में आए भूपेन्द्र यादव, राकेश यादव और कुंवरपाल सम्भल जिले के रहने वाले हैं और बेहद शातिर प्रवृत्ति के हैं। इनके पास से बरामद सामान ने जांच टीम के भी होश उड़ा दिए। ये आरोपी किसी गुप्त प्रेस में नहीं, बल्कि घर के एक कोने में रखे रंगीन प्रिंटर की मदद से 500 रुपये के नोट तैयार कर रहे थे। मौके से 12 हजार रुपये के तैयार जाली नोट और भारी मात्रा में अधछपे नोट बरामद किए गए हैं। इसके साथ ही एक स्प्लेंडर प्लस बाइक और तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। पूछताछ में पता चला कि ये आरोपी जानबूझकर उन पशु पेंठ और देहात के बाजारों को निशाना बनाते थे, जहां नकदी का लेन-देन इतना तेज होता है कि किसी के पास नोट को गौर से देखने की फुर्सत नहीं होती।

बैंक को ठगने का ₹50 लाख वाला खौफनाक मास्टरप्लान

​इस पूरी गिरफ्तारी की सबसे सनसनीखेज वजह वह साजिश थी, जो भविष्य के लिए बुनी जा रही थी। मुख्य आरोपी भूपेन्द्र यादव का इरादा महज बाजारों में फुटकर नोट खपाना नहीं था। उसने 'श्री श्याम प्रॉपर्टी' के नाम से भारतीय स्टेट बैंक में एक करंट खाता खुलवाया था। पुलिस के अनुसार, आरोपी की मंशा प्रॉपर्टी के नाम पर बैंक से ₹50 लाख का मोटा लोन हड़पने की थी। इस खौफनाक योजना का सबसे बड़ा खुलासा यह था कि वह इस विशालकाय लोन की किस्तों को उन्हीं नकली नोटों से चुकाने वाला था जो वह अपने प्रिंटर से छाप रहा था। अगर यह योजना सफल हो जाती, तो बैंकिंग सिस्टम के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका साबित होता।

डिजिटल साक्ष्य और अनसुलझे सवालों की तलाश

​वर्तमान में तीनों आरोपी पुलिस की सलाखों के पीछे हैं, लेकिन जांच की सुई अब उनके मोबाइल फोन और संपर्कों की ओर मुड़ गई है। बरामद किए गए फोनों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि बाजार में अब तक कितनी जाली करेंसी भेजी जा चुकी है। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि क्या बैंक लोन की प्रक्रिया में कोई अंदरूनी मददगार भी शामिल था। देहात के छोटे दुकानदारों के लिए यह घटना एक चेतावनी की तरह है, जिनकी ईमानदारी की कमाई पर ये शातिर जालसाज बड़ी बेरहमी से डाका डाल रहे थे। फिलहाल, पुलिस इस पूरे सिंडिकेट के अंतिम छोर तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है।


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