उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले की स्वार तहसील में इन दिनों निर्वाचन आयोग के निर्देशों पर मतदाता सूची के शुद्धिकरण का काम चल रहा है। इस विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम का मकसद अपात्रों के नाम हटाना और पात्रों के नाम जोड़ना है। लेकिन इसी बीच प्रशासन को एक ऐसी सूचना मिली जिसने अधिकारियों के कान खड़े कर दिए। खबर थी कि कुछ जनसेवा केंद्रों के संचालक नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए फर्जी अभिलेख तैयार कर रहे हैं ताकि निर्वाचन प्रक्रिया को अपने फायदे के लिए प्रभावित किया जा सके। इस शिकायत की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम अमन देवल ने बिना समय गंवाए एक विशेष टीम गठित की और खुद मैदान में उतरकर छापेमारी की योजना बनाई।

एसडीएम अमन देवल की औचक छापेमारी से मची अफरा-तफरी

एसडीएम और राजस्व टीम ने स्वार तहसील में कुल तीन चरणों में ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस दौरान कुल 08 जनसेवा केंद्रों को निशाने पर लिया गया। जैसे ही प्रशासन की टीम इन केंद्रों पर पहुंची, वहां मौजूद संचालकों और ग्राहकों में भगदड़ मच गई। जांच टीम ने एक-एक कंप्यूटर और लैपटॉप की गहराई से पड़ताल की। फैज़ान साहूंबर कैफे और नावेद ऑनलाइन प्वाइंट जैसे कुछ केंद्रों को छोड़कर बाकी जगहों पर जो नजारा दिखा, वह हैरान करने वाला था। वहां मौजूद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल सरकारी दस्तावेजों में एडिटिंग और कूटरचना यानी धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था। यह सीधे तौर पर लोकतंत्र की नींव यानी चुनाव प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ था।

फर्जीवाड़े की फैक्ट्री बने कंप्यूटर और लैपटॉप जब्त

निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि मनीष कम्प्यूटर, किसान ऑनलाइन प्वाइंट, जान लाईवर वी.जे. और राचा कम्प्यूटर्स जैसे केंद्रों पर फर्जी वोटर आईडी कार्ड, आधार कार्ड, जाति प्रमाण-पत्र और निवास प्रमाण-पत्रों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की जा रही थी। कंप्यूटर स्क्रीन पर सरकारी सॉफ्टवेयरों की नकल कर दस्तावेजों में बदलाव किया जा रहा था ताकि उन्हें असली जैसा दिखाया जा सके। एसडीएम अमन देवल ने तुरंत संज्ञान लेते हुए इन सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर सरकारी अभिरक्षा में ले लिया। प्रशासन का यह प्रहार उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो तकनीक का इस्तेमाल जनसेवा के बजाय अपराध के लिए कर रहे थे।

सलाखों के पीछे पहुंचे फर्जीवाड़ा करने वाले तीन मास्टरमाइंड

प्रशासन ने इस मामले में केवल जब्ती तक ही सीमित रहने के बजाय दोषियों को जेल की राह दिखाई है। पकड़े गए जनसेवा केंद्र संचालकों के खिलाफ सुसंगत कानूनी धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जेल जाने वालों में प्रदीप कुमार पुत्र हेतराम निवासी नवाबनगर, नावेद पुत्र शमशेर निवासी नवीगंज और राशिद अली पुत्र अहमद अली निवासी ग्राम इमरता राय शामिल हैं। एसडीएम अमन देवल ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ कोई भी समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो भी व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मतदाता सूची या अन्य सरकारी अभिलेखों को प्रभावित करने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जायेगी।


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