उत्तर प्रदेश की सियासत में रामपुर के मजबूत स्तंभ माने जाने वाले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद आजम खान ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा फैसला लिया है। आजम खान ने अपने सबसे महत्वाकांक्षी और 'ड्रीम प्रोजेक्ट' कहे जाने वाले मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से पूरी तरह नाता तोड़ लिया है। उनके साथ ही उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फात्मा और छोटे बेटे अब्दुल्ला आजम ने भी ट्रस्ट के सभी आधिकारिक पदों और सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब आजम खान का पूरा परिवार और यह ट्रस्ट शासन-प्रशासन की कड़ी कानूनी जांच के दायरे में है।

​मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट आजम खान के दिल के बेहद करीब रहा है। उन्होंने वर्षों के संघर्ष और मेहनत से इस ट्रस्ट की नींव रखी थी, जिसके बैनर तले मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और कई रामपुर पब्लिक स्कूलों का संचालन किया जाता है। अब तक आजम खान खुद इस ट्रस्ट के अध्यक्ष की भूमिका में थे, जबकि उनकी पत्नी तंजीन फात्मा सचिव और दोनों बेटे इसके सदस्य के रूप में कार्यरत थे। इस बड़े इस्तीफे के बाद अब ट्रस्ट की कमान आजम खान की बहन निकहत अफलाक को सौंपी गई है, जिन्हें नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं, आजम के बड़े बेटे अदीब आजम को ट्रस्ट के सचिव पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।

​जानकारों का मानना है कि आजम खान ने यह फैसला लगातार बढ़ते कानूनी शिकंजे को देखते हुए लिया है। वर्तमान में आजम खान और अब्दुल्ला आजम जेल में बंद हैं और ट्रस्ट की संपत्तियों तथा संचालन को लेकर कई अदालती मामले लंबित हैं। कानूनी गिरफ्त मजबूत होने के बाद संस्थानों के भविष्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से आजम खान ने खुद को और अपने उन परिजनों को ट्रस्ट से अलग किया है जो सीधे तौर पर मुकदमों का सामना कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. एसएन सलाम ने नई कार्यकारिणी के गठन की पुष्टि की है। यह बदलाव रामपुर की राजनीति और शैक्षिक ढांचे में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है, जहां आजम खान ने अपनी विरासत को सुरक्षित रखने के लिए कमान अपने विश्वस्त परिजनों के हाथों में सौंपी है।


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