​उत्तर प्रदेश के संभल जिला अंतर्गत चंदौसी के मोहल्ला चुन्नी की संकरी गलियों में एक ऐसी वारदात को अंजाम दिया गया, जिसने समाज और मानवीय रिश्तों को शर्मसार कर दिया है। यह कहानी केवल एक हत्या की नहीं, बल्कि साक्ष्य मिटाने की उस दरिंदगी की है जिसने मेरठ के चर्चित सौरभ हत्याकांड की वीभत्स यादें ताजा कर दी हैं। यहाँ एक पत्नी ने अपने अवैध संबंधों के रास्ते से पति को हटाने के लिए उसे मौत के घाट उतारा और फिर लाश के साथ वह किया जिसकी कल्पना मात्र से कलेजा कांप उठता है। करीब तीन दिन पहले पुलिस ने जब इस मामले की कड़ियाँ जोड़ीं, तो सच जानकर हर कोई दंग रह गया।

​नाले में मिले धड़ और 'राहुल' नाम के टैटू का रहस्य

​इस खौफनाक साजिश का खुलासा तब शुरू हुआ जब 15 दिसंबर की सुबह करीब 9 बजे पतरौआ रोड स्थित ईदगाह के पास एक नाले में कुत्तों को कुछ नोचते हुए देखा गया। सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकारी (सीओ) मनोज कुमार सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। नाले से एक युवक का सड़ा-गला अवशेष बरामद हुआ, लेकिन वह शव पूर्ण नहीं था। हत्यारों ने पहचान छिपाने के लिए मृतक का सिर और हाथ-पैर काटकर पहले ही राजघाट के पास गंगा में प्रवाहित कर दिए थे। पांच दिनों तक शव की शिनाख्त की कोशिशें नाकाम रहीं। आखिरकार 20 दिसंबर को जब शव का पोस्टमॉर्टम हुआ, तो मृतक के शरीर के एक हिस्से पर 'राहुल' नाम का टैटू गुदा मिला। इसी टैटू के जरिए मृतक की पहचान थाना रजपुरा के कस्बा गंवा निवासी राहुल के रूप में हुई, जो चंदौसी में रहकर जूते का कारोबार करता था।

​रंगेहाथ पकड़े जाने पर रची गई मौत की पटकथा

​पुलिस की जांच में सामने आया कि राहुल की शादी 15 साल पहले रूबी से हुई थी और उनके दो बच्चे भी हैं। राहुल को अपनी पत्नी रूबी और गांव के ही गौरव के बीच चल रहे अवैध संबंधों की भनक लग गई थी। 18 नवंबर 2025 की रात जब राहुल घर पहुँचा, तो उसने रूबी और गौरव को आपत्तिजनक स्थिति में रंगेहाथ पकड़ लिया। इसके बाद घर में भारी विवाद हुआ। राहुल ने समाज में इस बेवफाई को उजागर करने की चेतावनी दी, जिससे घबराकर रूबी और गौरव ने मिलकर राहुल को हमेशा के लिए खामोश करने की योजना बना ली। रूबी ने जूते में कील ठोकने वाले हथौड़े से और गौरव ने लोहे की रॉड से राहुल के सिर पर वार किया। जैसे ही वह जमीन पर गिरा, उसका सिर बुरी तरह कूच दिया गया ताकि बचने की कोई गुंजाइश न रहे।

​साक्ष्य मिटाने के लिए ग्राइंडर का इस्तेमाल और रेकी

​हत्या के बाद आरोपियों ने किसी शातिर अपराधी की तरह साक्ष्य मिटाने का काम शुरू किया। आरोपियों ने एक कारीगर से बिजली से चलने वाला इलेक्ट्रिक ग्राइंडर मंगवाया। घर के भीतर ही मशीन चलाकर राहुल के शव को कई हिस्सों में काटा गया। सिर और पैरों को बैग में भरकर गंगा में फेंक दिया गया, जबकि धड़ को भारी पत्थर से बांधकर नाले के दलदल में धकेल दिया गया। आरोपियों ने राहुल के खून से सने कपड़े भी जला दिए। इसके बाद 24 नवंबर को रूबी ने खुद थाने जाकर पति की गुमशुदगी की फर्जी रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोपियों ने लाश के टुकड़े फेंकने के लिए बकायदा उन रास्तों की रेकी की थी जहाँ सीसीटीवी कैमरे न लगे हों, ताकि उनकी कोई भी गतिविधि रिकॉर्ड न हो सके। हालांकि, फोरेंसिक टीम को घर की तलाशी के दौरान तख्त, लोहे की रॉड और हीटर पर खून के धब्बे मिल गए, जिसने झूठ की पोल खोल दी।


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​मासूम बेटी और पुलिस कप्तान का निर्णायक बयान

​इस पूरे मामले में राहुल की 10 साल की मासूम बेटी सबसे बड़ी चश्मदीद बनी। उसने पुलिस को बताया कि किस तरह उसकी माँ के पास आने वाले लोग उसके पिता को रास्ते से हटाने की बातें करते थे।

मृतक की बेटी ने बिलखते हुए पुलिस को बताया— "मम्मी और पापा में अक्सर लड़ाई होती थी। घर पर तीन लोग आते थे और मेरे लिए हमेशा चॉकलेट लाते थे। उनमें से एक व्यक्ति मुझसे कहता था कि बस कुछ महीने और रुक जाओ, फिर मैं ही तुम्हें रखूंगा और तुम्हारे पापा हमेशा के लिए बीच से हट जाएंगे। मैंने घर में वह सब देखा है जो नहीं देखना चाहिए था। मेरी मां और जिस किसी ने भी मेरे पापा के साथ यह हैवानियत की है, उन सबको फांसी की सजा मिलनी चाहिए।"

​संभल के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने इस मामले की गंभीरता और पुलिसिया कार्रवाई पर विस्तार से प्रकाश डाला है।

एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा— “पुलिस की गहन जांच और साक्ष्यों के संकलन से यह स्पष्ट हो गया है कि यह हत्या पूरी तरह से अवैध संबंधों और आपसी रंजिश के चलते की गई थी। पत्नी रूबी और उसके प्रेमी गौरव ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है। आरोपियों ने न केवल हत्या की, बल्कि साक्ष्य मिटाने के लिए शव को इलेक्ट्रिक ग्राइंडर से क्षत-विक्षत कर उसे अलग-अलग स्थानों पर फेंका, जो उनकी आपराधिक मानसिकता की क्रूरता को दर्शाता है। हमने घटना में प्रयुक्त ग्राइंडर मशीन, लोहे की रॉड, हथौड़ा, खून से सने कपड़े और वह वाहन भी बरामद कर लिया है जिसका उपयोग शव के टुकड़ों को ढोने में किया गया था। पुलिस इस मामले में कड़ी से कड़ी पैरवी करेगी ताकि इन अपराधियों को कानून के तहत सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके और समाज में एक कड़ा संदेश जाए।”

संभल का यह 'ग्राइंडर कांड' आधुनिक समाज के गिरते नैतिक मूल्यों और रिश्तों में बढ़ती हिंसक मानसिकता का एक भयावह उदाहरण है। जिस घर को खुशियों का बसेरा होना चाहिए था, उसे ही एक साजिश के तहत कत्लगाह में तब्दील कर दिया गया। एक पत्नी द्वारा अपने ही सुहाग के साथ की गई यह दरिंदगी न केवल कानून को चुनौती थी, बल्कि पवित्र वैवाहिक संस्था पर भी एक गहरा आघात है। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी और एक टैटू के निशान ने अपराधियों के मंसूबों को नाकाम कर दिया, लेकिन इस कांड ने दो मासूम बच्चों के भविष्य पर जो जख्म छोड़े हैं, उनकी भरपाई नामुमकिन है। रूबी और गौरव आज सलाखों के पीछे हैं, पर यह वारदात लंबे समय तक समाज को यह सोचने पर मजबूर करेगी कि आखिर अवैध संबंधों का जुनून इंसान को किस हद तक हैवान बना सकता है।

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