उत्तर प्रदेश के संभल में न्यायिक और प्रशासनिक टकराव ने एक बड़ा रूप ले लिया है। जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर के अचानक हुए तबादले के बाद स्थानीय वकीलों ने जिला न्यायालय परिसर में उग्र प्रदर्शन किया। वकीलों का दावा है कि यह महज एक सामान्य तबादला नहीं, बल्कि एक निष्पक्ष न्यायिक अधिकारी को उनके कड़े फैसले की सजा दी गई है। विभांशु सुधीर को सुल्तानपुर में सिविल जज के पद पर भेजा गया है, जिसे कानूनी हलकों में 'डिमोशन' (पदावनति) के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा मामला नवंबर 2024 में संभल की जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। 9 जनवरी 2026 को तत्कालीन सीजेएम विभांशु सुधीर ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और इंस्पेक्टर अनुज कुमार तोमर सहित 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था और सोशल मीडिया पर भी दो पक्ष बन गए थे। पुलिस प्रशासन ने इस आदेश को मानने के बजाय उच्च न्यायालय में चुनौती देने की बात कही थी।
वकीलों का आरोप और प्रदर्शन
बुधवार को चंदौसी स्थित जिला न्यायालय के बाहर वकीलों ने 'सीजेएम साहब को वापस लाओ' और सरकार विरोधी नारे लगाए। वकीलों का सीधा आरोप है कि सरकार ने पुलिस के दबाव में आकर एक ईमानदार जज को हटाया है। वकीलों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि ऐसे तबादले न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि जिस समय पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होनी थी, ठीक उसी समय जज का तबादला करना न्याय प्रक्रिया को बाधित करने जैसा है।
नए सीजेएम की नियुक्ति पर सवाल
विभांशु सुधीर की जगह अब आदित्य सिंह को संभल का नया सीजेएम नियुक्त किया गया है। आदित्य सिंह वही जज हैं जिन्होंने पूर्व में चंदौसी में तैनाती के दौरान जामा मस्जिद सर्वे से जुड़े संवेदनशील आदेश दिए थे। वकीलों के अनुसार, एक तरफ सख्त आदेश देने वाले जज को हटाना और दूसरी तरफ पूर्व में चर्चित आदेश देने वाले जज को कमान सौंपना, मामले की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। फिलहाल संभल में अदालती कामकाज प्रभावित है और वकील अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।
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