नोएडा के सेक्टर 150 में जिस निर्माणाधीन मॉल के गहरे बेसमेंट ने इंजीनियर युवराज की जिंदगी निगल ली, वहां से लगभग 100 घंटे बाद उसकी कार को बाहर निकाला जा सका है। शनिवार रात से मंगलवार दोपहर तक चली इस लंबी प्रक्रिया ने रेस्क्यू ऑपरेशन की कछुआ चाल और तैयारी की कमी को पूरी तरह बेनकाब कर दिया। जब मंगलवार को विशालकाय क्रेन की मदद से कार को पानी के गहरे दलदल से ऊपर खींचा गया, तो मंजर देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। कार की खुली हुई सनरूफ और मुड़ा हुआ बोनट चीख-चीख कर उस संघर्ष की गवाही दे रहे थे, जो युवराज ने अपनी आखिरी सांसों तक किया होगा। चार दिनों तक पानी के भीतर दफन रही यह कार अब उस आपराधिक लापरवाही का सबसे बड़ा भौतिक प्रमाण बन चुकी है, जिसे छिपाने की कोशिश बिल्डर और संबंधित अधिकारियों द्वारा की जा रही थी।
खुली सनरूफ और टूटी उम्मीदों के बीच मौत का वो खौफनाक मंजर
हादसे के बाद बरामद हुई कार की स्थिति यह इशारा करती है कि युवराज ने कार के पानी में डूबने के बाद बाहर निकलने की हर मुमकिन कोशिश की थी। कार का सनरूफ खुला होना इस बात का पुख्ता संकेत है कि वह पानी के बढ़ते दबाव के बीच ऊपर से निकलने का प्रयास कर रहा था। तस्वीरों में कार पर जमे जलीय झाड़ और कीचड़ यह बताते हैं कि वह बेसमेंट कितने दिनों से असुरक्षित स्थिति में खुला पड़ा था। युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने जो दर्द बयां किया है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। उनके अनुसार, पुलिस की टीम वहां खड़ी रही लेकिन किसी ने पानी में उतरने की जहमत नहीं उठाई। सवा घंटे तक युवराज फोन पर अपने पिता से बात करता रहा और मदद के लिए गुहार लगाता रहा, लेकिन सिस्टम के पास उसे निकालने के लिए न तो कोई तकनीक थी और न ही मानवीय संवेदना।
सत्ता की हंटर और लापरवाह तंत्र पर बड़ी कार्रवाई का आगाज़
युवराज की मौत के 100 घंटे बाद जब कार बाहर निकली, तब तक प्रशासन के ऊंचे पदों पर बड़ी खलबली मच चुकी थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को पद से हटा दिया है और बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। एसआईटी की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि आखिर निर्माणाधीन साइट पर कोई सुरक्षा दीवार या रिफ्लेक्टर क्यों नहीं था। 100 घंटों का यह घटनाक्रम बताता है कि कैसे एक होनहार इंजीनियर की जान विकास के नाम पर छोड़े गए मौत के कुओं की भेंट चढ़ गई। यह केवल एक सड़क हादसा नहीं है, बल्कि यह उन तमाम अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत का परिणाम है जो सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करते हैं। अब देखना यह है कि क्या यह गिरफ्तारी और तबादले भविष्य में ऐसे हादसों को रोक पाएंगे।
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