रूसी सेना ने उस अमेरिकी फाइटर जेट F-16 को मार गिराने का दावा किया है जिसे अमेरिका सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र बता रहा था। इस विनाशकारी हमले को अंजाम देने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे भरोसेमंद और बाहुबली कहे जाने वाले S-300 एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। रूसी सेना के एक जांबाज कमांडर, जिन्हें 'सेवर' कॉलसाइन से जाना जाता है, ने खुद इस बड़ी कामयाबी की जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि किस तरह रूसी रडार की नजर इस विमान पर जमी हुई थी और जैसे ही यह निशाने पर आया, रूस के मिसाइल सिस्टम ने पलक झपकते ही इसे आग के गोले में तब्दील कर दिया। यह घटना न केवल रूस-युक्रेन युद्ध में रूस की बढ़त को दिखाती है बल्कि वाशिंगटन और नाटो देशों के उन दावों की भी पोल खोलती है जिनमें F-16 को अजेय बताया गया था।

कमांडर सेवर की जुबानी रूसी शौर्य की पूरी कहानी
रूसी सरकारी मीडिया से बात करते हुए कमांडर सेवर ने इस पूरी सैन्य कार्रवाई का विस्तार से वर्णन किया है। उन्होंने बताया कि उनकी यूनिट लगातार दुश्मन के हवाई मूवमेंट पर नजर रख रही थी। जब अमेरिकी तकनीक से लैस यूक्रेन का F-16 विमान रूसी सीमा के करीब सक्रिय हुआ, तब S-300 सिस्टम ने उसे लॉक कर दिया। कमांडर के मुताबिक इस विमान को गिराने के लिए दोहरी रणनीति अपनाई गई। पहली मिसाइल ने विमान के डिफेंस मैकेनिज्म को ध्वस्त किया और उसे कमजोर कर दिया, जबकि उसके तुरंत बाद छोड़ी गई दूसरी मिसाइल ने विमान के परखच्चे उड़ा दिए। यह हमला इतना सटीक था कि पायलट को संभलने का मौका तक नहीं मिला। रूसी कमांडर ने तंज कसते हुए कहा कि पश्चिमी देश जिस विमान को गेम चेंजर बता रहे थे, वह रूसी मिसाइलों के सामने एक खिलौने से ज्यादा कुछ साबित नहीं हुआ।

पश्चिमी खेमे में खलबली और बदलते युद्ध के समीकरण
यूक्रेन के पास मौजूद F-16 विमानों का गिरना केवल एक सैन्य क्षति नहीं है, बल्कि यह यूक्रेन के मनोबल पर एक करारी चोट है। महीनों के इंतजार और कड़े प्रशिक्षण के बाद यूक्रेन को ये विमान मिले थे, ताकि वह रूस के हवाई दबदबे को चुनौती दे सके। लेकिन पुतिन के एयर डिफेंस सिस्टम ने यह साबित कर दिया है कि रूस की रक्षा पंक्ति को भेदना नामुमकिन के बराबर है। इस घटना के बाद अब नाटो देशों के भीतर भी बेचैनी बढ़ गई है क्योंकि वे भारी मात्रा में संसाधन और तकनीक यूक्रेन को सौंप रहे हैं, जो रूसी हमलों के सामने टिक नहीं पा रही है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यूक्रेन आगे भी इन कीमती विमानों का उपयोग जारी रखेगा या फिर रूस के S-300 और S-400 जैसे सिस्टम्स के खौफ से अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर होगा। फिलहाल, मलबे में तब्दील हुआ यह F-16 रूस की जीत के नए पोस्टर के रूप में देखा जा रहा है।
 


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