रुद्रपुर के रामलीला मैदान में आज सुबह से ही गहमागहमी का माहौल रहा। बंगाली कल्याण समिति के आह्वान पर अपनी मांगों को लेकर हजारों की तादाद में बंगाली समाज के लोग मैदान में पहुंचे। पिछले दस दिनों से चल रहे इस आंदोलन के आखिरी दिन महिलाओं से लेकर नौजवानों तक की भारी भीड़ देखने को मिली। हाथों में तख्तियां लिए लोग लगातार सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे थे। मैदान में जुटे लोगों का कहना था कि वे अपने हक की लड़ाई लड़ने आए हैं और जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे यहां से हटने वाले नहीं हैं।

​सड़क पर लगा लंबा जाम

रामलीला मैदान से निकलकर जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़े, तो उन्होंने रामपुर-नैनीताल हाईवे पर धरना दे दिया। अचानक सड़क पर उतरे लोगों की वजह से गाड़ियों के पहिए थम गए और दोनों तरफ लंबा जाम लग गया। हालात बिगड़ते देख पुलिस मौके पर पहुंची। अफसरों ने काफी देर तक भीड़ को शांत करने की कोशिश की। कड़ी मशक्कत और बातचीत के बाद पुलिस ने रास्ता खाली करवाया। हाईवे से हटने के बाद भी प्रदर्शनकारी रुके नहीं और सीधे कलेक्ट्रेट की तरफ कूच कर दिया।

​कलेक्ट्रेट में जबरन दाखिल


Advertisement

भीड़ के तेवर भांपते हुए प्रशासन ने कलेक्ट्रेट का मुख्य गेट पहले ही बंद कर दिया था। भारी पुलिस बल भी तैनात था, लेकिन गुस्से से भरे लोग गेट के सामने नहीं रुके। प्रदर्शनकारियों ने जोर लगाकर बंद गेट को खोला और बड़ी संख्या में परिसर के भीतर दाखिल हो गए। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने लोगों को रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी धरने पर बैठ गए और लिखित फैसले की मांग करने लगे।

​बरसों से इंसाफ का इंतजार

समाज के प्रतिनिधियों ने साफ किया कि वे साल 2001 से अनुसूचित जाति के दर्जे, बच्चों की छात्रवृत्ति, राज्य में बंग भवन के निर्माण और बांग्ला भाषा को सम्मान दिलाने के लिए आवाज उठा रहे हैं। हर बार सिर्फ आश्वासन देकर उन्हें लौटा दिया जाता है। प्रदर्शनकारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर आज उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो यह आंदोलन और बड़ा रूप लेगा और वे सीधे राजधानी देहरादून की ओर कूच करेंगे।

---समाप्त---