नई दिल्ली: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान Repo rate में 25 आधार अंकों (basis points) की कटौती कर दी है। आर्थिक विकास को गति देने और बाजार में तरलता (liquidity) बढ़ाने के उद्देश्य से किए गए इस कदम के बाद, प्रमुख नीतिगत दर अब घटकर 5.25% हो गई है। यह लगातार चौथी बार है जब केंद्रीय बैंक ने दरों में कमी की है।
ग्राहकों पर असर: EMI कब और कैसे होगी कम?
Repo rate वह दर है जिस पर वाणिज्यिक बैंक RBI से उधार लेते हैं, इसलिए इस कटौती से बैंकों की उधारी लागत कम हो जाती है। यह अपेक्षित है कि बैंक इस लाभ को गृह ऋण (Home Loan), वाहन ऋण (Auto Loan) और अन्य खुदरा ऋणों की ब्याज दरों में कटौती करके ग्राहकों तक पहुंचाएंगे, जिससे उनकी मासिक किस्त (EMI) कम होगी।

हालांकि, EMI पर इस कटौती का असर तत्काल नहीं होता है और यह आपके लोन के बेंचमार्क से जुड़ा है:
- MCLR से जुड़े मौजूदा लोन: जिन कर्जदारों का लोन MCLR (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट) जैसी पुरानी बेंचमार्क दर से जुड़ा है, उन्हें इस कटौती का सीधा लाभ तुरंत नहीं मिलेगा। उन्हें लाभ केवल उनके लोन के रीसेट साइकल (reset cycle) के दौरान ही मिलेगा, जिसकी अवधि बैंक के आधार पर छह महीने या एक साल हो सकती है।
- Repo rate से जुड़े नए लोन: अक्टूबर 2019 के बाद से RBI ने बैंकों के लिए नए फ्लोटिंग रेट वाले खुदरा ऋणों को रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क से जोड़ना अनिवार्य कर दिया है। इन ग्राहकों को सीधा और त्वरित लाभ मिलेगा, और उनकी EMI में कटौती की संभावना एक महीने के भीतर है।
अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन
विश्लेषकों का मानना है कि RBI का यह कदम त्योहारों के मौसम से पहले रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टरों में मांग को बढ़ावा देने में मदद करेगा, जिससे कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था में निवेश और उपभोग बढ़ेगा। बैंकों पर अब यह सुनिश्चित करने का दबाव है कि वे केंद्रीय बैंक की पहल का लाभ ग्राहकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाएं।
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