उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में जन वितरण प्रणाली की शुचिता को बनाए रखने के लिए प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई का बिगुल फूंक दिया है। रामपुर प्रखंड में सरकारी योजनाओं के नाम पर सेंधमारी करने वाले सफेदपोशों के चेहरों से नकाब उतरने लगा है। प्रखंड आपूर्ति विभाग ने गहन जांच के बाद 1700 से अधिक ऐसे अपात्रों की पहचान की है जो सालों से नियम-कायदों को ताक पर रखकर मुफ्त राशन की मलाई खा रहे थे। यह कार्रवाई सिर्फ कागजी नहीं है बल्कि उन रसूखदारों के लिए एक सख्त संदेश है जिन्होंने गरीबों के हक पर डाका डाला है। अब इन सभी जालसाजों के नाम राशन कार्ड की सूची से हटाने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई है।

डेटा मिलान से खुला फर्जीवाड़े का खेल

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी तेजस्वी आनंद के नेतृत्व में राशन कार्डों के आधार प्रमाणीकरण और डेटा सत्यापन की प्रक्रिया को तेज किया गया। आधुनिक तकनीक और विभिन्न सरकारी विभागों के डेटाबेस का आपस में मिलान किया गया तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। आपूर्ति विभाग ने राजस्व, परिवहन और आयकर विभाग के साथ मिलकर जब कड़ियां जोड़ीं, तो पाया गया कि जो लोग खुद को गरीब बताकर सरकार से अनाज ले रहे थे, असल में वे आलीशान जीवन जी रहे हैं। इस डिजिटल जांच ने उन तमाम रास्तों को बंद कर दिया है जिनका सहारा लेकर अपात्र लोग व्यवस्था को चकमा दे रहे थे।

गरीबों की थाली पर संपन्न लोगों का डाका

जांच की रिपोर्ट किसी को भी हैरान कर सकती है। अपात्रों की सूची में ऐसे नाम शामिल हैं जो समाज के संपन्न वर्ग से आते हैं। इसमें सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारी, नियमित रूप से आयकर भरने वाले नागरिक और वे किसान शामिल हैं जो पहले से ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ ले रहे हैं। इतना ही नहीं, मुफ्त राशन लेने वालों के घर के बाहर तीनपहिया और चारपहिया वाहन खड़े पाए गए हैं। सबसे शर्मनाक तथ्य यह है कि कई ऐसे लोग भी सरकारी अनाज के लिए कतार में लगे थे जिनकी मासिक आय एक लाख रुपये से अधिक है। ढाई एकड़ से अधिक उपजाऊ भूमि के मालिक होने के बावजूद इन लोगों ने व्यवस्था में झूठ बोलकर अपनी जगह बनाई थी।

प्रशासन का अल्टीमेटम और सख्त कार्रवाई

अपात्रों की इस पहचान के बाद अब पूरे जिले में हड़कंप मचा हुआ है। विभाग ने पारदर्शिता बरतते हुए चिह्नित किए गए सभी लोगों की सूची आपूर्ति कार्यालय और जन वितरण प्रणाली की दुकानों पर सार्वजनिक कर दी है। नोटिस के जरिए साफ कर दिया गया है कि जिन लोगों ने अपनी आय, संपत्ति और रोजगार के बारे में गलत जानकारी देकर कार्ड हासिल किए थे, उनके पास सुधार का यह आखिरी मौका है। प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि अपात्रों ने खुद आकर कार्ड सरेंडर नहीं किया, तो उन्हें न केवल विधिक कार्रवाई का सामना करना होगा बल्कि अब तक लिए गए राशन की कीमत बाजार दर पर सरकारी खजाने में जमा करानी होगी।


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